मांगें न मानी तो संसद भवन कूच करेंगे

Sri nagar Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST

श्रीनगर। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वर्षों से घाटी में रह रहे सिखोें ने केंद्र और राज्य सरकार की दोहरी नीति की आलोचना की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि घाटी में रह रहे सिखोें को न्याय नहीं दिया गया और उनकी मांगों को न पूरा किया गया तो वे दिल्ली तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए श्रीनगर के लाल चौक से संसद भवन तक मार्च करेंगे।
दो दिनों तक घाटी में चले सिख सम्मेलन में घाटी के सिखों की समस्याओं को रखा गया। सिखोें ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मांग की कि देश के अन्य राज्यों की तरह रियासत में भी सिख मैरिज एक्ट को लागू किया जाए। घाटी के सिखों के साथ हो रहे भेदभाव पर वक्ताओं ने कहा कि घाटी से पलायन कर चुके कश्मीरी पंडितों को तो केंद्र और रियासती सरकार लाखों का पैकेज दे रहे हैं, लेकिन आतंकवाद के दिनोें में भी घाटी न छोड़ने वाले सिखों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। आल पार्टी सिख को-आर्डिनेशन कमेटी (एपीएससीसी) के चेयरमैन जगमोहन सिंह रैना ने सरकार पर दबाव डाला कि वे घाटी में धारा 370 होने के बावजूद सिखों को अल्पसंख्यक का दर्जा दें, ताकि उन्हें उनके अधिकारों से वंचित न किया जा सके। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग जम्मू-कश्मीर को काफी फंड मुहैया करवा रहा है और यदि इसका सही तरीके से वितरण किया जाए तो ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसका लाभ उठा सकेंगे। रैना ने कहा, ‘कश्मीर में रहने वाले सिख, खासकर युवा रोजगार, उच्च शिक्षा और सुरक्षा की अनिश्चितता को लेकर भयभीत हैं।
सम्मेलन में सिख नेता हरचरण सिंह खालसा ने देश में लागू सिख मैरिज एक्ट को जम्मू-कश्मीर राज्य में भी लागू करने की मांग की ।
उन्होंने इस एक्ट को राज्य में जल्दी लागू करने के लिए सरकार से आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाने की मांग की। सिख कौम के लिए स्टेट सब्जेक्ट मुहैया करवाने, दो दशकों के आतंकवाद के दौरान सिखोें को हुए नुकसान का मुआवजा देने, रियासत के पढ़े लिखे सिख युवकों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने, विशेष रोजगार पैकेज तथा समुदाय के युवकों को अन्य पलायन कर्ताआें की तर्ज पर देश के तकनीकी व गैर तकनीकी कालेजोें में दाखिला दिलवाने की मांग सम्मेलन में उठी।
जाने-माने लेखक और अकाली दल (ब) नेता अजीत सिंह मस्ताना ने रियासती सरकार से अपील की कि पंजाबी टीचर और लेक्चरर के खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि पंजाबी पढ़ने वाले छात्रों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। सम्मेलन में मास्टर हकूमत सिंह, करनैल सिंह पीर मोहम्मद, एसजीपीसी सचिव दिलमेग सिंह, जीपीसी प्रेसीडेंट डा. मोहन सिंह संत, निरंजन सिंह, जसबीर सिंह ओबराय आदि ने भी अपने विचार रखे और रियासत में लंबित गुरुद्वारा चुनाव भी जल्द करवाने की मांग की।

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