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गर्भवति महिला को नहीं दी एम्बूलेंस, गर्भ में ही हो गई शिशू की मौत, जांच के निर्देश जारी

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Mon, 20 May 2019 01:04 AM IST
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राजोरी। जिले की बुद्धल तहसील के गब्बर गांव की एक महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर जिला अस्पताल रेफर तो कर दिया गया, लेकिन एंबुलेंस प्रदान नहीं की गई। इस स्थिति में राजोरी पहुंचने से पहले गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई।
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जानकारी के अनुसार रुबीना अख्तर को शुक्रवार रात को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उसे तत्काल बुद्धल के सरकारी पीएचसी में लाया गया। जहां महिला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रात को जब गर्भवती के परिजन उसे राजोरी लाने लगे तो एंबुलेंस चालक ने एंबुलेंस में तेल न होने की बात कह कर टाल दिया। काफी प्रयास करने के बाद गर्भवती को इमरजेंसी में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई व काफी समय नष्ट करने के बाद परिजन उसे एक निजी वाहन से राजोरी ले आए। वहीं जिला अस्पताल में पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच की तो पाया कि शिशु की गर्भ में ही मौत हो चुकी है। वहीं डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मृत शिशु को निकाला व बड़ी कठिनाई के बाद महिला की जान बचाई गई। वहीं अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही पर कड़ा रोष प्रकट करते हुए महिला के पति इकबाल व स्थानीय सरपंच ने न्याय की मांग की है।
सरपंच फारूक ने कड़ा रोष प्रकट करते हुए बताया कि तथ्य यह है कि गर्भवती महिलाओं को मुफ्त एंबुलेंस सेवाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन उक्त मामले में मेडिकल रिपोर्ट पर लिखा गया था कि एंबुलेंस में तेल नहीं है। उन्होंने बताया कि एक और केंद्र सरकार व प्रशासन बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को लेकर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं और दूसरी और जमीनी स्तर पर दूर दराज की गर्भवती महिलाओं को आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। सरपंच ने डीसी से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि वह मामले की जांच कराएं और कसूरवार अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करें। सरपंच ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही शिशु की मौत के जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पहीं की गई तो वह लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।
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क्या कहते हैं सीएमओ
कोटरंका मेडिकल ब्लॉक के बीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है कि गर्भवती को मुफ्त में एंबुलेंस उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। जब तक बीएमओ अपना जवाब पेश करते तब तक उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है।
-डॉ. सुनील शर्मा, सीएमओ, राजोरी

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