...तो कैसे लगेगा ‘रेफर सिस्टम’ पर ब्रेक

Rajouri Updated Thu, 21 Nov 2013 05:43 AM IST
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राजोरी। राजोरी का जिला अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते खुद बीमार होने लगा है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शामलाल ने करीब दो साल पहले सख्त निर्देश जारी करते हुए ‘रेफर सिस्टम’ पर अंकुश लगाने के लिए कहा था। लेकिन बावजूद इसके जिला अस्पताल से हर रोज औसतन दो मरीजों को जम्मू के मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। इसकी वजह अस्पताल में मैन पॉवर की कमी है। प्रर्याप्त ढांचा होते हुए भी मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा।
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अस्पताल प्रशासन मैन पावर बढ़ाने के लिए कई बार मंत्री से बात कर चुका है, लेकिन इस पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। जानकारी के अनुसार जम्मू संभाग में मेडिकल कॉलेज, जम्मू के बाद राजोरी के जिला अस्पताल में सबसे अधिक मरीज पहुंचते हैं। हर महीने अस्पताल में औसतन ओपीडी 20 हजार है, जबकि 2700 के करीब मरीज हर महीने अस्पताल में दाखिल होते हैं। औसतन 150 मरीज हर महीने जम्मू मेडिकल कॉलेज में रेफर किए जाते हैं, क्योंकि अस्पताल में मैन पावर की कमी है।
अस्पताल में आवश्यक मैन पावर में करीब 30 फीसदी की कमी है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में 23 डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन सिर्फ 11 ही भरे गए हैं। इनमें भी आठ इमरजेंसी संभालते हैं। तीन एनेस्थीसिया के पदों में से दो ही भरे हैं, एक खाली है। दो रेडियोलाजिस्ट के पद खाली हैं। अस्पताल में छह थियेटर बनाए गए हैं। एनेस्थेसिया विशेषज्ञ की कमी के चलते यह थियेटर भी धूल फांक रहे हैं। जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने ही विधानसभा हल्के के जिला अस्पताल की यह हाल है, तो बाकी जगहों के बारे में सोचा जा सकता है। यहां आधे से भी कम डॉक्टर उपलब्ध हैं। अरबों रुपये खर्च कर जिला अस्पताल की इमारत तैयार कर गई है, लेकिन मैन पॉवर न होने से सब कुछ बेकार हो गया है।
क्या करते हैं अधिकारी
अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अरुण शर्मा ने माना कि यहां मेडिकल अधिकारियों की काफी कमी है। इस वजह से काम प्रभावित हो रहा है। गायनी, सर्जन और फिजिशियन तो उपलब्ध हैं, लेकिन एक एनेस्थेसिया का एक विशेषज्ञ कहां-कहां जाएगा। दो रेडियोलाजिस्ट भी नहीं है। फिजिशियनों को अल्ट्रासाउंड करने पड़ते हैं। इस बारे में मंत्री से भी बात की गई है। उम्मीद है जल्द ही कुछ हल निकलेगा।
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