इस साल कम होगी मक्की की पैदावार

Rajouri Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
राजोरी। इस साल मानसून के देरी से आने का खामियाजा मक्की उत्पादकों को भुगतना पड़ेगा। कृषि विभाग की मानें तो इस साल मक्की की पैदावार में 20 फीसदी तक की गिरावट आएगी।
कृषि विभाग के चीफ एग्रीकल्चर अधिकारी जीआर गलोत्रा ने बताया कि जिले के 46 हजार 300 हेक्टेयर पर मक्की लगाई गई है। प्रति हेक्टेयर पर औसत 21 क्विंटल पैदावार होने की संभावना थी, लेकिन देर से आए मानसून से इसकी पैदावार पर असर पड़ा है। उनका कहना है कि 15 से 20 फीसदी तक इस साल कम पैदावार होगी। दरअसल, मक्की लगाने के समय किसानों को खेतों में नमी नहीं मिली। सख्त जगह में ही मक्की लगानी पड़ी। इसकी वजह से काफी पौधे जमीन से ही नहीं निकले।विभाग ने इस साल किसानों को हाइब्रिड बीज भी दिए थे, ताकि रिकार्ड तोड़ पैदावार हो सके, लेकिन बारिश ने मेहनत पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि अभी पिछले दिनों काफी बारिश हुई, इससे भी नुकसान हुआ। कुल मिलाकर इस साल बारिश के खेल में ही मक्की की फसल फंस गई। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा है। उल्लेखनीय है कि राजोरी-पुंछ में मक्की और गेहूं ही मुख्य रूप से होती है, लेकिन जिले में सिंचाई की कोई खास व्यवस्था नहीं होने से किसानों को बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यही कारण है कि बारिश समय पर न आए तो नुकसान और अगर समय से पहले आए तो भी नुकसान।

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