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जिले के कई सरकारी स्कूलों का परीणाम 33 प्रतिशत से भी कम

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 25 May 2019 02:15 AM IST
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राजोरी। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के मकसद से सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने के अलावा कई ठोस कदम उठाती है, लेकिन धरातल स्तर पर सरकारी स्कूलों की हालत सुधर नहीं रही है। इस बात का खुलासा हाल ही में 10वीं कक्षा की बोर्ड की वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के साथ हुआ है।
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जम्मू कश्मीर राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी परिणाम गैजट के अनुसार जिले के कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनका परिणाम 33 प्रतिशत से भी कम है, जबकि एक सरकारी स्कूल ऐसा भी है जिसका एक भी विद्यार्थी परीक्षा में पास नहीं हो पाया है व उसका परिणाम शून्य प्रतिशत रहा है। जिन सरकारी स्कूलों का परिणाम 33 प्रतिशत से भी कम है उनमें एक कन्याओं का सरकारी स्कूल ऐसा भी है जो कि शहर से सटे जवाहर नगर इलाके में है और सीईओ कार्यालय से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है।
सरकारी स्कूलों में बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम में सुधार लाने के लिए हर साल शिक्षा विभाग कई निर्णय लेता है, लेकिन परिणाम आने पर हालात पहले जैसे रहते हैं। शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभाग हर साल ऐसे स्कूलों के हेडमास्टरों व अन्य शिक्षकों की इंक्रीमेंट बंद कर देता है जिनका परिणाम संतोषजनक नहीं रहता है, लेकिन इससे हालत नहीं सुधर रहे हैं। विभाग को चाहिए कि ऐसे स्कूलों के शिक्षकों की एक सूची बनाए जिनके परिणाम अच्छे नहीं होते हैं व उन शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करे। अधिकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में अधिक बच्चे गरीब परिवारों के होते हैं और सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा नहीं मिलने से गरीब बच्चे पढ़ाई के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।
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किन किन स्कूलों का परिणाम रहा 33 प्रतिशत से कम
गजट के अनुसार जिले के बेहरोट स्थित सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल का परिणाम मात्र 11 प्रतिशत रहा है। सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल चिंगस का 27 प्रतिशत, सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल उड़ान का 30 प्रतिशत, सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल अपर सरियाल का 30 प्रतिशत, सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल लंबेड़ी का 16 प्रतिशत, लड़कों के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल थन्नामंडी का 13 प्रतिशत, सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल भवानी का 30 प्रतिशत, सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल गंभीर मुगलां का 30 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल दरहाल का 23 प्रतिशत, कन्याओं के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल पलांगड़ का 22 प्रतिशत रहा, सरकारी हाई स्कूल रंथल का 30 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल ठंडी कस्सी का 29 प्रतिशत। इसके अलावा सरकारी हाई स्कूल सेहर का परिणाम 20 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल कल्लर का परिणाम 32, सरकारी हाई स्कूल कंथोल का 29 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल करहड का 25 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल दलोगड़ा का 30 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल धारा दुलियां का 29 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल हट्टन सेरी का 28 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल हंजाना का 30 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल गरन का 22 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल गगरोट का 22 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल डोडाज दरहाल का 20 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल समरोलिया का 4 प्रतिशत रहा, जबकि सरकारी हाई स्कूल सरूला का 12 प्रतिशत रहा।
वहीं सरकारी हाई स्कूल सवाड़ी न. 2 का परिणाम 4 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल काला झंगड़ का 10 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल खा न.1 का 10 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल खेड़ी का 11 प्रतिशत, सरकारी हाई स्कूल मनयाल थन्नामंडी का 8 प्रतिशत रहा। सरकारी हाई स्कूल नारला का 17 प्रतिशत , सरकारी हाई स्कूल चौधरीनाड़ का 14 प्रतिशत रहा। सरकारी हाई स्कूल दबर पोठा का 18 प्रतिशत रहा। सरकारी हाई स्कूल डुंगी का 17 प्रतिशत रहा। कन्याओं के सरकारी हाई स्कूल जवाहर नगर का 9 प्रतिशत रहा। सरकारी हाई स्कूल सुंदरगली का 0 प्रतिशत रहा। सरकारी हाई स्कूल बद्दाकन्ना का परिणाम 12 प्रतिशत रहा।
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क्या कहते हैं सीईओ
जिन स्कूलों का परिणाम 33 प्रतिशत से कम रहा है उनके हेडमास्टरों व अन्य शिक्षकों की इंक्र ीमेंट पर रोक लगा दी गई है। स्कूलों के हेडमास्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
-एमए राथर, सीईओ, राजोरी

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