तिल-तिल कर जीए थे एक साल

Punch Updated Sat, 23 Nov 2013 05:43 AM IST
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पुंछ। देश के विभाजन के तुरंत बाद स्वायत्त रहे पुंछ राज्य पर आतंक और मौत के काले बादल छा गए थे। करीब एक वर्ष पुंछ के लोग तिल-तिल कर जी रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों और कबाइलियों ने पुंछ पर कब्जा जमा लिया था। काफी मशक्कत और भारी नरसंहार के बाद 22 नवंबर 1948 को ब्रीगेडियर प्रीतम सिंह की अगुवाई में पुंछ को भारत का हिस्सा बनाया गया। उक्त बातें पुंछ के उन बुजुर्गों ने साझा कीं, जिन्होंने पुंछ को कबाइलियों से घिरे हुए देखा था। बुजुर्ग बचन सिंह, शांति देवी और गुलाम मो. ने कहा कि उस समय एकता और भाईचारा न होता तो आज पुंछ आजाद न होता।
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इन बुजुर्गों ने उस पीड़ा को सहन किया है जो एक वर्ष तक पुंछ की आवाम ने झेली थी। इन लोगों का कहना है कि ब्रीगेडियर प्रतीम सिंह की बहादुरी, हिम्मत, तुरंत निर्णय लेने और आम लोगों से मेल-मिलाप ने ही पुंछ को भारत के साथ जोड़ा है। इनका कहना है कि जब कबाइलियों ने पुंछ पर हमला किया था तो उन्होंने सभी रास्तों कश्मीर वाया उड़ी, राजोरी, मेंढर हर तरफ से पुंछ को काट कर रख दिया था। केवल पुंछ नगर में ही ब्रिगेडियर प्रीतम सिंह की अगुवाई में कुछ भारतीय सेना के जवान मौजूद थे।
बेतार नदी के उस पास से कबाइली लगातार हमले कर रहे थे। ऐसे में प्रीतम सिंह ने न सिर्फ पुंछ में लोगों के सहयोग से हवाई पट्टी का निर्माण करवाया, बल्कि लोगों के सहयोग से कबाइलियों को मार कर खदेड़ा। आखिरकार 22 नवंबर को करीब दो बजे पुंछ नगर से करीब 13 किलोमीटर दूर दानी के पीर में राजोरी से आगे बढ़ रही भारतीय सेना के ब्रिगेडियर पंडित के साथ मुलाकात कर पुंछ का भारत से लिंक अप किया था।
एकता है तो कोई हरा नहीं सकता : हुड्डा
पुंछ (ब्यूरो)। जिस प्रकार पुंछ में आवाम और फौज मिल कर काम कर रहे हैं, ऐसे में हमें कोई हरा नहीं सकता। ये बातें सेना की 16 कोर कोर कमांडर ले. जन. डीएस हुड्डा ने 65वें लिंकअप डे के मौके पर कहीं। उन्होंने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए बहुत बड़ा दिन है, जिसे फौज और आवाम मिलकर मना रहे हैं। हुड्डा ने कहा कि ऐसी एकता के सामने आतंकियों की एक नहीं चलेगी। उन्होंने फिर दोहराया कि सीमा पार दो से तीन सौ आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं, लेकिन सेना पूरी तरह सतर्क है। कोर कमांड ने पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से भी मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।
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