किसानों की मेहनत का कद्रदान नहीं कोई

Punch Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
कठुआ। जिले के किसानों के लिए फूलों की खेती वरदान है, लेकिन किसी प्रकार की मार्केट न होने के चलते किसानों का रूझान इस ओर से हटता जा रहा है। विभागीय आंकडे़ भी इसी ओर इशारा करते हैं।
आंकड़ाें के अनुसार वर्ष 2010-2011 में फूलों की खेती के लिए सात प्रोग्रेसिव ग्रोअर बने, वर्ष 2011-2012 में आंकड़े में कोई फेरबदल नहीं हुआ। वर्ष 2012-2013 में मात्र तीन ही प्रोग्रेसिव ग्रोअर बन सके। विभाग इस खेती से वर्तमान में लगभग 100 किसानों को मदद कर रहा है। जिले में वर्तमान में करीब 220 कनाल भूमि पर फूलों की खेती की जा रही है। किसान संगठनों के अनुसार साल में एक बार किसान इस खेती को भारी संख्या में अपनाते हैं, लेकिन अगले साल फिर पारंपरिक खेती ओर चल देते हैं।
जिले में केवल दो ही किस्म गारलैंड और ओपन पालिनेटड फलों की खेती की जा रही है। इसमें एक कनाल में कम से कम सात से दस हजार का फायदा किसान ले सकता है, लेकिन इसके बाद भी किसानों का रूझान फूलों की खेती की ओर से हटता जा रहा है।
खरीददार की कमी है खेती में रोड़ा
फूलों की खेती किसानों के लिए मात्र लालच से अधिक कुछ नहीं है। सरकार द्वारा इसे लेकर बनाई योजनाएं अधूरी हैं। क्योंकि फूलों की खरीददारी के लिए कोई योजना ही नहीं बनाई गई है। किसान फूलों की खेती तो कर लेते हैं, पैदावार भी अच्छी हो जाती है, लेकिन जिले में कोई खरीददार न होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में किसान एक साल खेती करने के बाद इसे छोड़ देते हैं। शादियों के मौसम में या फिर त्यौहारों के मौके पर ही फूलों की बिक्री होती है। इसके बाद किसानों को बेचने के लिए जम्मू जाना पड़ता है।
-चौधरी शिव देव सिंह, राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष

क्या कहते हैं अधिकारी?
वर्तमान में फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या 100 से अधिक है। प्रोग्रेसिव ग्रोअर की संख्या कम हुई है। जिले में खरीददारी की समस्या है, लेकिन विभाग किसानाें की हर संभव मदद करता है। विभाग की ओर से किसानों के लिए जम्मू के खरीददारों के साथ इंटरएक्शन करवाई जाती है। इसके बाद किसान अपने फूलों की जम्मू में बेच सकता है।
-सुनील सिंह, सहायक फ्लोरिकल्चर अधिकारी, कठुआ

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