वतन लौटना चाहते हैं गुमराह युवक

Punch Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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पुंछ। कुछ वर्ष पहले आतंकवाद का प्रशिक्षण लेने अथवा जिले में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के बाद नियंत्रण रेखा पार कर पीओके चले गए क्षेत्र के युवाओं की घर वापसी के लिए जहां केन्द्र और राज्य सरकार ने पुनर्वास नीति चला रखी है वहीं हर हफ्ते जिले में भारत-पाकिस्तान के बीच खुलने वाली चक्का दा बाग की राहे मिलन से इस पार आने वाले पीओके वासी ऐसे गुमराह नौजवानों की घर वापसी में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इस बात का खुलासा वीरवार को मेंढर पुलिस द्वारा नेपाल के रास्ते लौटते हुए जिले के पकडे़ गए हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी सरफराज़ ने किया।सरफराज़ के अनुसार, वह 1999 में आतंकियों के साथ उस पार चला गया था। जहां पर हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेने के बाद 2000 में वह इस पार लौटा था और 2003 तक सुरनकोट तहसील में आतंकी संगठन पीरपंजाल रेजिमेंट की गतिविधियों को संचालित करता रहा और उसके बाद अपने ही गांव के शौकत अली की पत्नी जिसे वह पंसद करता था को लेकर पीओके चला गया था। पिछले वर्ष पीओके कोटली जहां उसने आतंकी ट्रेनिंग पाई थी। सरफराज़ ने कहा कि उस पार पीओके में मौजूद अधिकतर लोग करीब 95 प्रतिशत युवा घर लौटना चाहते हैं।अपने वतन लौटने के प्रयासों के बारे में सरफराज़ ने कहा कि मैंने कोटली में मौजूद एक ट्रेवल एजेंट का सहारा लिया। जिसने ढाई लाख रुपये लेकर मेरा पाकिस्तान से नेपाल के लिए टूरिस्ट वीजा बनवाया। जहां से मैं इस पार आ गया। सरफराज़ ने कहा कि एक तो उस पार चले गए गुमराह लोगों को इस बात का अहसास हो गया है कि पाकिस्तान ने हमें हिंदुस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किया है। दूसरा उस पार मुहाजिरों की खस्ता हालत और उस पार पीओके सहित पूरे पाकिस्तान के हालतों के नासाज़गार होने और सबसे बड़ा हिंदुस्तान की हुकूमत की तरफ से चलाई जाने वाली पुनर्वास नीति के चलते मुझ जैसे सभी लोग घर वापस आना चाहते हैं, परंतु पाकिस्तान उनकी राह में रोड़े अटका रहा है।
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