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धार डुगनू में एंबुलेंस नहीं पालकी है जीवन रक्षक

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Dec 2020 12:44 AM IST
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गूत्रा से पालकी पर मरीज को लेकर आते लोग
गूत्रा से पालकी पर मरीज को लेकर आते लोग - फोटो : KATHUA
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बिलावर। उप जिला बिलावर क्षेत्र के कई गांव आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। इस वजह से मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके आजादी के सत्तर वर्षों के बाद क्षेत्र के कई गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। यही वजह है कि क्षेत्र के लोगों को आज भी घर का जरूरी सामान तक सिर पर उठाकर घर पहुंचाना पड़ता है। शनिवार को धार डुगनू में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें गर्भवती महिला को कई किलोमीटर पालकी पर उठाने के बाद सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया जा सका। हालांकि गनीमत यह रही है कि जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि क्षेत्र के गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाए।
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जानकारी अनुसार शनिवार को बिलावर के गूत्रा गांव की मीना देवी पत्नी मुकेश सिंह को सुबह के समय प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए ग्रामीणों ने पालकी तैयार की है। इसके बाद पालकी से मीना को पांच किलोमीटर खराब रास्ते से लोअर धार डुगनू के सेरी गांव तक पहुंचाया। इसके बाद उसे गाड़ी की मदद से दस किलोमीटर बिलवार अस्पताल पहुंचाया जा सका। जहां उसने बच्चे को जन्म दिया। इस तरह के मामले अन्य बीमारियों के दौरान भी देखने को मिलते हैं, बावजूद इसके सरकार ने इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठा पाई है। हालत यह है कि कई ग्रामीण आज भी कई सड़क सुविधा से कोसों दूर हैं।

गूत्रा, सैली और कुंड इलाके के लोगों के लिए यह अब रोजमर्रा की बात हो गई है। जिले का दूर-दराज धार डुगनू इलाका आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है ज्यादातर इलाके में आज भी सरकार की ओर से पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है वहीं स्वास्थ्य सुविधाएं केवल नाम की ही है और इलाका दूरदराज होने के कारण इलाके में बीमार होने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। - कुलदीप कुमार, सरपंच धार डुगनू
इलाके में आज तक कोई भी प्राथमिक उपचार केंद्र नहीं बनाया गया है। दूरदराज इलाके के रहने वाले लोग अगर बीमार पड़ जाए तो उन्हें इलाज करवाने के लिए बिलावर जाना पड़ता है वही पैदल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण मरीज को पालकी में बिठाकर निचले इलाकों की तरफ जाना पड़ता है जिससे काफी दुश्वारियां होती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते कई लोग आज तक अपनी जान रास्ते में ही गवा बैठते हैं। -हंसराज, पूर्व अदालती चेयरमैन धार डुगनू
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