खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

Kathua Updated Mon, 25 Nov 2013 05:43 AM IST
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कठुआ। शिक्षा क्षेत्र में करोड़ों खर्च करने के बाद भी जिला में शिक्षा व्यवस्था को सुधारा नहीं जा सका है। एक तो शिक्षकों की भारी कमी तो जिले के तमाम स्कूलों में है ही, उस पर बुनियादी ढांचे को तैयार करने में भी सरकार नाकाम साबित हो रही है। लिहाजा स्कूली शिक्षा का स्तर गिरना लाजमी है। आलम यह है कि विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्ष 2012-13 के आंकड़ों की बात करें तो शिक्षा विभाग को 823 स्कूलों की इमारतों का निर्माण करवाना था, लेकिन विभाग अभी तक केवल 490 स्कूलों का निर्माण कार्य ही करवा पाया है। बाकी स्कूलों का निर्माण कार्य कब पूरा होगा, इसको लेकर विभाग भी आशंकित है। आंकड़ों के अनुसार विभाग को वर्ष 2012-13 में 571 प्राइमरी स्कूलों का निर्माण करवाना था, लेकिन अभी तक केवल 393 का निर्माण कार्य ही पूरा हो पाया है। वहीं इस साल 252 अपर प्राइमरी स्कूलों को भी निर्माण करवाया जाने का लक्ष्य विभाग ने स्थापित किया था, लेकिन अभी तक केवल 97 स्कूलों का ही निर्माण पूरा हो पाया है। एसएसए के तहत बनने वाले इन स्कूलों में देरी के कारण विद्यार्थियों को बेहतर स्कूली ढांचा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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कक्षा के निर्माण में विभाग सुस्त
स्कूलों में नए कमरों के निर्माण करवाने में विभाग सुस्त दिख रहा है। वर्ष 2012-13 में विभाग को 261 नए कमरों का निर्माण करवाना था, लेकिन 201 कमरों का ही निर्माण करवाया जा सका। ऐसे में विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में एक से अधिक कक्षाओं को चलाना पड़ता है।
जितनी राशि आई, उतना हुआ काम
स्कूलों की इमारतों के निर्माण में एसएसए के तहत राशि जारी होती है। ऐसे में जितनी राशि आएगी, उतना ही काम हो पाएगा। विभाग को किश्तों में राशि जारी की जाती है। ऐसे में निर्माण कार्य में देरी हो रही है। राशि की उपलब्धता पर ही निर्माण कार्य निर्भर करता है।
-नरेंद्र संब्याल, जिला शिक्षा योजना अधिकारी
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