खानाबदोश बच्चे शिक्षा से वंचित

Kathua Updated Fri, 25 Oct 2013 05:42 AM IST
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कठुआ। गुज्जर समुदाय के लिए विशेष रूप से बनाए गए मोबाइल प्राइमरी स्कूलों के अस्तित्व पर लगे ग्रहण के कारण इस समुदाय के लोगों की शिक्षा भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। आतंकवाद की दस्तक के बाद जिला के 18 मोबाइल प्राइमरी स्कूल को स्टेशनरी बना दिया गया। इन स्कूलों के मूवमेंट बंद होने के कारण इस समुदाय के अधिकतर बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। कुछ वर्षों में जिले के कुल इक्कीस में से अठारह स्कूलों को स्टेशनरी कर दिया गया है। हालांकि समुदाय का पेशा नहीं बदला है और उन्हें पहले की ही तरह वर्तमान में भी खानाबदोशों का जीवन व्यतीत कर साल में दो बार पहाड़ों से आने और जाने का सिलसिला जारी रखना पड़ रहा है। लेकिन स्कूलों को स्टेशनरी किए जाने से इस समुदाय के बच्चों के अशिक्षित रह जाने की संभावनाएं बढ़नी शुरू हो गई हैं। जिले की कुल ग्यारह प्रतिशत और राज्य की पच्चीस प्रतिशत आबादी गुज्जर बक्करवाल समुदाय से संबंधित हैं। ऐसे में शिक्षा को लेकर इस तरह से लापरवाही आने वाले दिनों में और भी महंगी पड़ सकती है। एक समय पर कठुआ के एमपीएस तरफ सांजी, एमपीएस कुमरी, लखनपुर से बठिंडी, दन्ना-धनोड़, बरनोटी से फलोट, बस्ती नंगल, जोध जुथाना, बाख्ता, मढ़ीन से खानपुर, बिलावर से सारंगला, वैली, धराल्ता, मल्हार से कुपवाड़ा, सरिया, थमाल, महानपुर से नंद, भड्डू से गौड़, बिजानी मोबाइल प्राइमरी स्कूल स्टेशनरी हो चुके हैं। कुछ साल से सरकार लगातार सौ नए मोबाइल स्कूल खोलने पर विचार कर रही है, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पा रहा है।
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आतंकवाद के चलते स्कूलों को किये थे स्टेशनरी
आतंकवाद के चरम पर होने के दौरान समुदाय की असुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन राज्यपाल ने एक बैठक में इन स्कूलों को स्टेशनरी करने के निर्देश जारी किए थे। वर्तमान में समुदाय ने एक बार फिर मौसम के अनुरूप पलायन शुुरू कर दिया है। साल के दस महीने तक वे खानाबदोश का जीवन अपने मवेशियों के साथ ही व्यतीत करते हैं।
हाल ही में स्टेट एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था। उसके बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी समुदाय की शिक्षा प्रभावित नहीं हो इसके लिए 100 मोबाइल स्कूल देने और कई स्टेशनरी हो चुके स्कूलों को एक बार फिर शुरू करने के लिए आश्वस्त किया है। जल्द ही इस तरह के कदम उठाए जाने से समाज को एक नई दिशा की ओर अग्रसर किया जा सकता है।
-बशीर नाज, उपाध्यक्ष, गुज्जर बक्करवाल स्टेट एडवाइजरी बोर्ड
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