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मौनी अमावस्या पर में लगाई डुबकी

Kathua Updated Mon, 11 Feb 2013 05:31 AM IST
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कठुआ। सूर्य तथा चंद्रमा गोचरवश मकर राशि में प्रवेश करने पर रविवार को मौनी अमावस्या का योग बना। संपूर्ण शक्ति से भरा हुआ पावन अवसर मौनी अमावस्या को मनु ऋषि का जन्म दिवस भी माना जाता है। इसलिए इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मकर राशि, सूर्य तथा चंद्रमा का योग इसी दिन होता है। अत: इस अमावस्या का महत्व बढ़ जाता है। इस दिन पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। इसी कड़ी में मिनी हरिद्वार के नाम से प्रसिद्ध तीर्थ ऐरवां में लोगों ने डुबकी लगाई। इस दिन मौन व्रत रखने का भी विधान है। इस व्रत का अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी इंद्रियों को अपने वश में रखना चाहिए। धीरे-धीरे अपनी वाणी को संयत करके अपने वश में करना ही मौन व्रत है। ऐरवां तीर्थ में कई लोग इस दिन मौन व्रत रखने का प्रण किया।
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क्या है का धार्मिक महत्व
मौनी अमावस्या पर सामर्थ्य के अनुसार दान, पुण्य तथा जाप करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम में अथवा किसी तीर्थ में स्नान पर जाने की नहीं है तो वह अपने घर में उठ कर प्रात: काल अपने घर के समीप किसी नदी या नहर में स्नान कर सकता है। पुराणों के अनुसार इस दिन नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है। मनुष्य दान में गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, बिस्तर, तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं सामर्थ्य के अनुसार दे सकते हैं।

बाल योगेश्वर गौतम जी महाराज

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