डेढ़ टन भुक्की तस्करी के दोनों आरोपी बरी

Kathua Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
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कठुआ। मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में पिछले साढ़े तीन वर्ष से न्यायिक हिरासत में चल रहे दो आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलाें को सुनने के बाद अदालत ने न सिर्फ आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया, बल्कि जम्मू कश्मीर में मादक पदार्थों से संबंधित मामलों को लेकर अभियोजन पक्ष में रहने वाली खामियों पर भी सवाल उठाए।
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मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार नौ जुलाई 2009 को लखनपुर पहुंचे मालवाहक वाहन नंबर जेके01ई-2790 को जांच के लिए रोका गया। कश्मीर के बड़गाम से यह वाहन दिल्ली जाना था। टोल पोस्ट लखनपुर पर आबकारी विभाग की टीम ने निरीक्षण करने के दौरान पाया कि वाहन में जूट बैग सहित भुक्की की खेप भी छिपाई गई है। भुक्की को वाहन के नीचे छिपाया गया था, जिसका कुल वजन 1540 किलोग्राम आंका गया। इस मामले में वाहन के चालक फरीद अहमद निवासी बड़गाम और सहचालक इम्तेयाज अहमद निवासी बनिहाल के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 के तहत अभियोजन शुरू कर दिया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश कर उन्हें दोषी करार देने का भरसक प्रयास किया। वहीं बचाव पक्ष से वकील निधि सुमन और रजनी कांत ने अभियोजन के दावों और सबूतों को बेबुनियाद करार देते हुए मुवक्किलों को रिहा करने की मांग की। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमके हंजूरा ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना आदेश सुनाया। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले को संदेह के घेरे से बाहर निकालने में विफल साबित हुआ है। बरामद किए गए मादक पदार्थ का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। वहीं बरामद सामान का सीजर और सैंपल लेने की प्रक्रिया भी सवालों से घिरी रही। इसी तरह से मादक पदार्थ में मॉरफीन का प्रतिशत कितना है, यह भी नहीं दर्शाया गया है। और तो और इस पूरे मामले में गवाहों के बयान कब दर्ज किए गए, इनकी तारीख तक का उल्लेख नहीं है। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत पिछले साढ़े तीन साल से हिरासत में चल रहे आरोपियों को बरी करती है।


पंगु एफएसएल पर कोर्ट की खरी-खरी
कठुआ (ब्यूरो)। रियासत में आपराधिक मामलों के अभियोजन पक्ष को वैज्ञानिक आधार से मजबूती देने पर अदालत ने जोर दिया है। सोमवार को मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपियों को बरी करने के साथ ही अपनी टिप्पणी में अभियोजन की कमजोरियों पर अफसोस जताया। अदालत ने कहा कि रियासत की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री में ऐसे टूल ही उपलब्ध नहीं हैं जो मादक पदार्थों का पूरा विवरण उपलब्ध करवा सकें। बुनियादी पहलुओं की पड़ताल किए बिना ऐसे मामले अंत में महज एक ड्रामा अथवा बिना आधार के स्पाई थ्रिलर साबित होते हैं। अदालत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के आलोक में ऐसा प्रतीत होता है कि व्यवस्था में समझ तब बढ़ेगी, जब नारकोटिक्स का प्रभाव और विकराल हो जाएगा।

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