खुलेगी रियासत की पहली औषधीय मंडी

Kathua Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
कठुआ। खास जलवायु के चलते औषधीय पौधों की खेती के लिए मुफीद रियासत में जल्द ही अलग से मंडी फरहाम होगी। इसके लिए कठुआ शहर की सैटेलाइट फ्रूट एंड वेजिटेबल मंडी को चुना गया है, जहां पर अलग से शेड बनाकर औषधीय पौधों के उत्पादों की खरीद बिक्री हो सकेगी।
पहले चरण में बाकायदा दस लाख रुपये की लागत से ढांचागत सुविधा दी जा रही है। इसेे अगले चरण में बढ़ाया भी जा सकता है। दरअसल जम्मू कश्मीर की जलवायु औषधीय पौधों के विकास में अनुकूल है।
रियासत की अलग अलग भौगोलिक परिस्थितियों में पनपने वाली दुर्लभ जड़ी बूटियाें से लेकर फलाें का उत्पादन तो होता है लेकिन बाजार की कमी के चलते औषधीय पौधों के उत्पाद को सही मूल्य नहीं मिल पाता। नतीजतन असीम संभावनाओं के बावजूद औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा। इसी को देखते हुए कठुआ जिला मुख्यालय स्थित सैटेलाइट फ्रूट एंड वैजिटेबल मंडी में ही औषधीय उत्पादों की खरीद बिक्री के लिए शैड बनाया जाएगा। इसमें एलोवेरा, हरड़, बेहड़ा और आंवला सरीखी औषधीय उत्पादाें को बिचौलियों से हटकर बेचा जा सकेगा। एक तरफ जहां कच्चे माल की खपत हो सकेगी वहीं प्रसंस्करण को लेकर भी किसानाें को विकल्प मिल सकेंगे।
एग्रीकल्चर प्लानिंग एंड मार्केटिंग कमेटी के सचिव एके मंसोत्रा के अनुसार रियासत में कहीं पर भी औषधीय पौधों के उत्पाद की मंडी उपलब्ध नहीं है। कठुआ में मंडी का विकल्प मिलना बड़ी राहत होगी। जम्मू कश्मीर राज्य से देश भर में औषधीय पौधों के उत्पाद का निर्यात होता है। इसमें रियासत में कहीं पर भी मंडी उपलब्ध नहीं है जिसके चलते किसानाें को खासी परेशानियाें का सामना करना पड़ता है। पहली मंडी खुलने से औषधीय पौधों की खेती को यकायक पंख लग सकेंगे। इससे किसानों को भी राहत मिलेगी।

किसानों की तकदीर बदल सकती है औषधीय खेती
कठुआ। औषधीय पौधों की खेती न सिर्फ औषध विज्ञान के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों को नफा दिलाने में भी इसका कोई सानी नहीं है। काले जीरे का मूल्य 2 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है, तो सुगंधबाला 600 रुपये प्रति किलोग्राम आसानी से बिकती है। कुथ का मूल्य 2 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है, तो कलमी हरड़ अस्सी से नब्बे रुपये प्रति किलोग्राम बिक सकती है।
औषधीय फल और जड़ी बूटियों की यह तमाम किस्में कठुआ जिले के अलग-अलग इलाकों में पनप सकती हैं। कृषि विज्ञान केंद्र में एसएमएस एग्रोफॉरेस्ट्री डॉ. विशाल गुप्ता के अनुसार कठुआ जिले में हरड़, बनक्षा, सुगंधबाला, लेमन ग्रास, आंवला, काला जीरा और कुथ जैसे औषधीय उत्पादाें की खेती की व्यापक संभावना है। सबसे बड़ी समस्या बाजार की कमी है। यदि कठुआ में औषधीय पौधों के उत्पाद की मंडी खुलती है, तो किसानों को इस खेती से बड़े स्तर पर फायदा हो सकता है। डॉ. विशाल गुप्ता के अनुसार किसान औषधीय पौधों की खेती के लिए बीज व पौधे आईएचबीटी पालमपुर अथवा आईआईआईएम जम्मू से हासिल करें, ताकि औषधीय पौधों की खेती में कानूनी स्तर पर कोई अड़चन न आ सके।

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