सरकारी नजरे इनायत को तरस रही कला नगरी

Kathua Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
बसोहली। जिला के पहाड़ी क्षेत्रों में खूबसूरती समाए हैं। बसोहली के पहाड़ और इन नजारों में कुछ ऐसे भी प्राकृतिक पर्यटन स्थल हैं जो अनछुए और अनदेखे हैं। अंतरराष्ट्रीय कलानगरी बसोहली जिला के खूबसूरत पहाड़ी इलाकों का बेजोड़ संगम है। धार महानपुर, माश्का, रंजीत सागर झील, चामुंडा देवी मंदिर आदि इस इलाके के मनोहरम दृश्यों का बेजोड़ संगम हैं।
प्राकृतिक नजारों से परिपूर्ण शिवालिक और पीर पांचाल पहाड़ों के बीच का यह क्षेत्र लखनपुर से रावी दरिया के किनारे 72 किलोमीटर पहाड़ों की ओर बसा एक बेहतरीन क्षेत्र है। आयुर्वेद से लेकर पहाड़ी पेंटिंग्स की नायाब यादों को समाए बसोहली क्षेत्र में पर्यटन के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में बन रहे रावी दरिया को पंजाब और हिमाचल से जोड़ते पुल को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विस्तार की संभावनाएं और भी बढ़ जाती हैं। पंजाब और हिमाचल से आने वाले पर्यटकों को इस ओर रिझाने के लिए मात्र कुछ कदम ही कारगर साबित हो सकते हैं। गीत गोविंद कड़ी की पेंटिग्स और पश्मीना शाल ने बसोहली को एक नई पहचान दी है, लेकिन समय के साथ इनपर भी सरकार की नजर-ए-इनायत न होने से यह कला कहीं पिछड़ सी गई है।
बसोहली से मात्र पच्चीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित सननघाट प्रकृति की बेजोड़ कलाकारी का नायाब नमूना है जिसे बरसों तक न तो छुआ गया है और न ही इसकी खूबसूरती को पर्यटकों तक विस्तार करने के कोई सकारात्मक कदम सामने आए हैं। पूर्व राज्यपाल ने अपने कार्यकाल के दौरान इलाके का दौरा कर इसे निहारते हुए यहां कई प्रकार की योजनाओं के विस्तार पर भी सहमति जताई थी, जिसमें यहां ऐट होल गाल्फ कोर्स के विस्तार की योजना पर विचार चला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने तीन बार इस क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन उनके प्रयास भी परवान नहीं चढ़ पाए। आसपास के पहाड़ी इलाकों के मुकाबले कई गुणा अधिक पर्यटन की संभावनाओं को समेटे बसोहली को आज भी इंतजार है कि सरकार अपनी नजर-ए-इनायत इस ओर करे और बसोहली भी पर्यटन मानचित्र पर अपनी छाप छोड़कर पर्यटकों को लुभाए, जिससे की व्यापार और रोजगार का भी विस्तार हो सके।
स्थानीय निवासी डीके शर्मा ने बताया कि बसोहली इलाके की खूबसूरती को तराशने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। यह इलाके विकसित होने पर जहां राजस्व को सुदृढ़ करने में सहायक हो सकते हैं। वहीं इलाके के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी लेकर आएंगे। इसपर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

बसोहली इलाके में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए ही कई बार प्रयास किए जा चुके हैं। सरकार जम्मू के इन इलाकों के साथ भेदभावपूर्ण नीति अपनाए हुए है। गोवा से आई विशेष टीम ने भी अपने सर्वे में रंजीत सागर झील को वाटर स्पोर्ट्स के लिए माकूल बताया, लेकिन वादों के बाद भी सरकार कुछ जमीनी हकीकत में करने को तैयार नहीं है। कश्मीर को छोड़कर सरकार की मंशा जम्मू के किसी भी इलाके का विकास करने की नहीं है।
-जगदीश राज सपोलिया विधायक बसोहली

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