न विषय और न शिक्षक, कैसे सीखें कला

Kathua Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
कठुआ। प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, लेकिन प्रतिभा को निखारने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। स्कूली शिक्षा विभाग में चित्रकला विषय इस आशय को लेकर अपवाद बना है। पूरी शिक्षा प्रणाली में चित्रकला पढ़ाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि समय-समय पर चित्रकला की प्रतियोगिताओं को स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानाें पर आयोजित करवाया जाता है। हाल ही में सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश के अनुसार सरकारी स्कूलों में चौथी से छठी कक्षा तक चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई जानी हैं। अमूमन इस तरह के आयोजन को लेकर स्कूलाें में उत्साह देखा जाता है, लेकिन चित्रकला विषय और दिए गए थीम ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों को दुविधा में डाल दिया है। सरकारी आदेश के अनुसार चौथी से छठी कक्षा के बच्चाें को वैकल्पिक ऊर्जा के महत्व पर चित्रकला करवाने को कहा गया। बाकायदा प्रतियोगिता का आयोजन प्रस्तावित है, जबकि चौथी से छठी कक्षा के स्तर के लिए यह विषय जटिल माने जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों के कुछ शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चित्रकला को बतौर विषय पढ़ाने के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में चौथी से छठी कक्षा के स्तर को जटिल विषय देकर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन समझ से परे है। बच्चे तो बच्चे खुद शिक्षकों को भी इस विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता करवाने का पता नहीं चल पा रहा है।

छात्रों की रचनात्मकता हो रही प्रभावित
स्कूल स्तर पर लुप्त हो चुके चित्रकला विषय का खामियाजा विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में जम्मू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किए गए डिसप्ले योर टैलेंट में चित्रकला प्रतियोगिता पर निर्णायक मंडल की टिप्पणी ने शिक्षा व्यवस्था की किरकिरी कर डाली। निर्णायक मंडल ने प्रतियोगी विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देने से ही मना कर दिया था। मंडल सदस्यों ने केवल सांत्वना पुरस्कार देते हुए विडंबना जताई कि विद्यार्थियों को चित्र और कार्टून का अंतर ही नहीं मालूम। ऐसे में वह किसी को पुरस्कार कैसे दे सकते हैं।

क्या है निर्देश?
सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिनांक सत्रह सितंबर 2012 को भेजे गए निर्देश के अनुसार हर स्कूलों में चौथी से छठी कक्षा तक के विद्यार्थियों में चार अक्तूबर तक चित्रकला प्रतियोगिता करवाई जाए। निर्देश के अनुसार प्रतियोगिता में हवा, पानी और सौर ऊर्जा कालंबी अवधि के लिए इस्तेमाल और बिजली बचाओ, उन्नति लाओ विषयो पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन करवाने के लिए कहा गया है। यह प्रतियोगिता करवाना स्कूल प्रशासन के लिए अनिवार्य है।

राज्य में एनसीईआरटी की शिक्षा व्यवस्था को अपनाया गया, जिसके बाद से कई अन्य कारणाें के चलते चित्रकला विषय की पढ़ाई बंद कर दी गई। तत्कालीन आर्ट टीचर को जनरल लाइन टीचर बना दिया गया। वर्तमान में चित्रकला विषय स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है।
-जेके सूदन, मुख्य शिक्षा अधिकारी कठुआ

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