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हाशिए पर आती दिख रही छात्र राजनीति

Kathua Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
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कठुआ। कालेजों में छात्र संघ के चुनाव छात्र राजनीति का एक अहम हिस्सा माने जाते हैं। युवाओं को सक्रिय राजनीति में लाने का पहला पड़ाव यहीं से शुरू होता है। लेकिन जिले के कई कालेजों में छात्र संघ के चुनावों को लेकर अभी तक किसी प्रकार की सरगरमी नहीं दिखी है।
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पूर्व कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष विशु अंदोत्रा के अनुसार छात्रों को सक्रिय राजनीति में आने के लिए चुनावों की समझ होना जरूरी है। और वर्तमान समय की मांग भी है कि युवा राजनीति में सक्रिय रूप से हिस्सा लें। कालेज प्रास्पेक्टस पर भी छात्र संघ के चुनावों का जिक्र किया गया है। लेकिन गत वर्ष और इस वर्ष चुनावों को लेकर किसी भी तरह की तैयारियां कालेज प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। जिससे युवाओं का सक्रिय राजनीति में और छात्र राजनीति ठंडी पड़ती नजर आ रही है। गत वर्ष को छोड़ दिया जाए तो कालेज में चुनाव तो हुए, लेकिन छात्रों को सक्रिय राजनीति में आने का कभी मौका ही नहीं मिल पाया। अगर छात्र संगठनों की मानें तो चुनावों को कालेज प्रशासन द्वारा जानबूझ कर देरी से करवाया जाता है। जिससे छात्रों में रोष भी व्याप्त है। ऐसे में इस वर्ष भी छात्र संघ के चुनावों को लेकर संशय बरकरार है।

कैसे होते हैं छात्र संघ के चुनाव
कालेजों में चुनाव देश के राष्ट्रपति को चुनने की प्रक्रिया जैसे करवाए जाते हैं। कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष को चुनने के लिए पहले कालेज में स्नातक के तीनों भागों की कुल अंग्रेजी सेक्शनों के दो सीआर चुने जाते हैं। उसके बाद यह सीआर अपने कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष को चुनते हैं। फिर सीआर के साथ चुने हुए अध्यक्ष की बैठक होती है, जिसमें कालेज छात्र संघ कमेटी बनाई जाती है। यह कमटी छात्रों और कालेज प्रशासन में मध्यस्थ का काम करती है।

ठंडी हुई छात्र राजनीति
छात्र संगठन एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री राहुल देव, पीएसए के जिला इकाई अध्यक्ष संजय कुमार, एनपीएसयू के जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा के अनुसार छात्र राजनीति अब ठंडी पड़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण जिले में हर राजनीतिक पार्टी की युवा इकाई है। छात्रों को राजनीतिक समझ नहीं होने के कारण अकसर वे दल बदलते रहते हैं। छात्रों में राजनीतिक समझ भी कम होती जा रही है। इसके चलते छात्र राजनीति थोड़ी ठंडी पड़ी है।

गत वर्ष किन्ही कारणों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए। लेकिन भारत सरकार द्वारा कालेजों में चुनावों को बैन किया गया है। फिर भी कालेज छात्र संघ कमेटी इस वर्ष जरूर बनाई जाएगी। कालेज में अभी दाखिला प्रक्रिया जारी होने के कारण अभी कमेटी बनाने की प्रक्रिया के लिए किसी प्रकार की तैयारियां नहीं की गई हैं।
-नेत्र सिंह रैना, प्रिंसिपल, डिग्री कालेज कठुआ

चुनाव छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। भारत सरकार ने युवाओं को राजनीति में लाने के लिए ही 18 वर्ष की आयु में मतदान का अधिकार दिया है। अगर कालेजों में चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं तो यह छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। छात्र राजनीति सक्रिय राजनीति का अहम हिस्सा है। लिहाजा कालेजों में चुनावों जरूर होने चाहिए।
- पूर्व मंत्री बाबू सिंह

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