भागवत कथा में मनाया कृष्ण जन्मोत्सव

Kathua Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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बिलावर। हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की। नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, इन स्वर लहरियों से शिव मंदिर का प्रांगण उस समय गूंज उठा, जब वहां जारी श्रीमद्भागवत कथा में श्री कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाने लगा। पुरा पंडाल गोकुल में परिवर्तित हो गया और वहां उपस्थित सभी नर-नारी गोप-गोपियां बन कर नृत्य गीत करने लगे। इससे पूर्व श्री कृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कथा वाचक संत कुलदीप शास्त्री ने बताया कि जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ गया। कंस तरह-तरह से भगवान के भक्तों को सताने लगा और साधु संतों को यातनाएं देने लगा, तो उस समय भगवान विष्णु ने कंस की काल कोठरी में बंधक पड़ी देवकी की कोख से जन्म लिया। उनके जन्म के समय मूसलाधार बारिश होने लगी, बादल गरजने लगे। सभी पहरेदार सो गए और कारागार के सभी बंद दरवाजे अपने आप खुल गए। लिहाजा कंस के प्रकोप से बचाने के लिए वासुदेव श्री कृष्ण को एक टोकरी में डाल कर गोकुल स्थित नंद बाबा के घर छोड़ आए। यहां दूसरे दिन नंद के घर प्रभु के जन्म की खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फै ल गई और सभी गोप गोपियां इकट्ठा होकर नंद बाबा के घर जश्न मनाने लगे।

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