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सब कुछ गंवाया, अब न्याय के लिए हो रहे दरबदर

Kathua Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
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कठुआ/महानपुर। रणजीत सागर बांध परियोजना के प्रभावितों को न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। स्थिति यह है कि जिसने डैम में सब कुछ गंवा दिया, उसे भी रोजगार के लिए अयोग्य करार दिया जा रहा है। जबकि अपनी सारी जमीन और घर-बार खोने के सरकारी रिकार्ड भी डैम ओस्तियों के पास है। अब प्रशासन कहता है कि पुराना रिकार्ड ही गलत है। ऐसी स्थिति से आजिज आकर डैम ओस्तियों ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
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बांध परियोजना की वजह से भूमि और घर तक गंवा चुके कुनबाें में एक है मानू पंचायत के बैरा गांव का राकेश कुमार। उसकी आप बीती सरकारी उदासीनता और लाल फीताशाही की बानगी को दर्शाती है। राकेश कुमार जिस कुनबे से है, वह बांध परियोजना की वजह से जमीन और मकान दोनों खो चुका है। बाकायदा इसकी तसदीक नायब तहसीलदार की कलम करती है, जिसकी रिपोर्ट राकेश कुमार के परिवार की सौ फीसदी संपत्ति बांध की झील के दायरे में आना दर्शाती है। लेकिन कोर्ट आदेश के बाद जब नए सिरे से वेरीफिकेशन हुई तो राकेश कुमार को लाभ की योग्यता से बाहर कर दिया गया।
नई रिपोर्ट में बताया गया कि राकेश कुमार के परिवार की कुल बाइस फीसदी संपत्ति ही प्रभावित हुई है, लिहाजा उसे रोजगार नहीं मिल सकता। दस्तावेजों का पुलिंदा लेकर राकेश कुमार अब दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। अब वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सोच रहा है। राकेश कुमार ने बताया कि रणजीत सागर बांध परियोजना में जो परिवार अपना सब कुछ खोने को मजबूर हुए, उनमें उसका कुनबा भी शामिल था। बांध परियोजना बसोहली के भूमि अधिग्रहण कलेक्टर को दी गई दरख्वास्त के जवाब में उसे नायब तहसीलदार ने सौ फीसदी नुकसान की श्रेणी में शामिल करते हुए डैम ओस्ती घोषित किया। इसी के आधार पर रोजगार के आवेदकों की सूची में उसका नाम शामिल है। लेकिन जब रोजगार देने की बारी आई तो उसे न्याय नहीं दिया जा रहा। राकेश कुमार ने बताया कि वह पिछले एक वर्ष से निचले अधिकारियों से लेकर जिला उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काटता आ रहा है। सोमवार को भी वह जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचा और अपनी दास्तान सुनाई। राकेश कुमार के अनुसार सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने पर उसे आरटीआई का आवेदन वापस लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह दर्शाता है कि रोजगार आवंटन में धांधली की जा रही है।

पुरानी रिपोर्ट में 60 फीसदी गलत
सरकारी रिकार्ड के अनुसार राकेश के कुनबे की कुल पच्चीस कनाल भूमि है, जिसमें केवल बाइस फीसदी ही परियोजना से प्रभावित हुई है। नायब तहसीलदार द्वारा जारी पुरानी रिपोर्टों में से साठ फीसदी मामले तथ्यपरक नहीं पाए गए। ऐसे में पांच सदस्यीय कमेटी द्वारा नए सिरे से वेरिफिकेशन करवाई गई है। -अशोक शर्मा, एसडीएम, बसोहली

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