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श्रद्धालुओं ने किया गीता सार का श्रवण

Kathua Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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कठुआ। आर्य समाज द्वारा श्रावण पर्व पर आयोजित सावन अमृत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने गीता सार का श्रवण किया।
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कथा के तीसरे दिन स्वामी अक्षरानंद ने गीता सार की मानव जीवन में प्रासंगिकता बतलाते हुए श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति से निहाल कर दिया।
कथा के तीसरे दिन स्वामी अक्षरानंद ने श्रद्धालुओं को भागवत गीता सार का पाठ पढ़ाया। गीता सार का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि उसके साथ क्या अच्छा या बुरा हो रहा है, क्योंकि जो भी घटित होता है, वह पूर्व निर्धारित होता है। जो होता है, अच्छे के लिए होता है, जो हुआ अच्छे के लिए हुआ और जो होगा अच्छे के लिए होगा। मनुष्य को कभी किसी के खो जाने या बिछुड़ जाने की चिंता नहीं करनी चाहिए। मानव धरती पर खाली हाथ जन्म लेता है और मृत्यु के बाद भी खाली हाथ होता है। इसलिए भौतिक सुखों की अनुभूति भ्रम मात्र है। संसार का सच्चा सुख प्रभु भक्ति में हैं। मानव जीवन भर भौतिक सुखों के पीछे भागता रहता है, लेकिन प्रभु भक्ति ही सुखों की अनुभूति का सबसे सरल माध्यम है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को केवल कर्म करने की सलाह देते हुए कहा कि कर्म करना ही मानव का परम धर्म है। उसे फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। यही गीता का सार भी है।

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