अब ट्राउट बनेंगी युवाओं के रोजगार का सहारा

Kathua Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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कठुआ। लजीज व्यंजनों की शान बनी ट्राउट मछली को जिले में एक नई पहचान दिलाने के साथ ही विभाग ने स्थानीय युवाओं को भी अवसर देने शुरू कर दिए हैं। जिले में पहली बार एक प्राइवेट ट्राउट फिश पालन सेंटन खुड़बा में खोला जा रहा है। इतना ही नही पांच और प्रपोजल भी भेजे जा चुके हैं, जिससे इस बेहतरीन मछली के जिले में पालन की अपार संभावनाओं को साकार होते देखा जा रहा है। ताजे पानी की इस मछली के पालन से स्वरोजगार के नए विकल्प खुलने भी तय हैं। बाजार में इस मछली की मांग को देखते हुए मछली पालन की ओर युवाओं का रुझान बीते दिनों में बढ़ा है। दुनिया में बेहतरीन मछलियों में शुमार ट्राउट पालन में राज्य के मछली पालन के आंकड़े इसे बेहतरीन पायदान पर खड़ा करने की क्षमता रखते हैं। स्थानीय निवासी अयाज मोहम्मद और युवा आरिफ ने बताया कि ट्राउट मछली को लेकर खुड़बा में खोला जा रहा सेंटर कारगर साबित हुआ है। इसे देखकर स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना जगी है। राज्य में ट्राउट पालन में पिछले दो दशक में खासी बढ़त दर्ज की गई हैै। राज्य में ओवा ट्राउट मछली के बीज को सबसे पहले सन 1899 में लाया गया, लेकिन हवाई यातायात की उपलब्धता न होने से पहला बीज सफल प्रयोग में नहीं लाया जा सका। वहीं 19 दिसंबर 1900 को लाई गई ट्राउट का कश्मीर के दच्छीगाम में पालन किया गया। सन 1901 में कश्मीर के बाहरी इलाके हरवन में पहली ट्राउट हैचरी खोली गई। यूके से मंगवाई गई इस मछली को राज्य में उपयुक्त माहौल मिला। यूरोपियन संघ के सहयोग से कश्मीर के कुकरनाग में इसे बीते दो दशकों में व्यापक स्तर पर तैयार किया जाता है। विभाग द्वारा लारीबल और कठुआ जिले के लोवांग से सटे खुर्दबा में भी वर्तमान में ट्राउट का पालन किया जा रहा है। राज्य में पैदा की जाने वाली ट्राउट में रेनबो ट्राउट और ब्राउन ट्राउट प्रमुख हैं। हालैंड से मंगवाई गई ट्राउट फीड से इस मछली को जीवन कालों के दौरान संरक्षण में सहायता मिल रही है। विभाग के अनुमान के अनुसार लगभग ट्राउट पालन को पंाच लाख मिलियन प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ाने को अग्रसर है। इससे राज्य में न सिर्फ इन यूनिटों में ट्राउट पालन को मदद मिलेगी, बल्कि प्रस्तावित राज्य के 200 नए ट्राउट रियरिंग यूनिटों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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