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अजीब हरकत करते दिखे सिती हाई स्कूल के बच्चे

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 22 Jun 2019 01:48 AM IST
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कठुआ। बनी के सित्ती हाई स्कूल में विद्यार्थियों खासकर छात्राओं के अजीब व्यवहार करने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार और वीरवार को भी स्कूल में चार बच्चे अजीब व्यवहार करते नजर आए। मामले ने स्कूल प्रबंधकों को भी सकते में डाल दिया है। उधर, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शुक्रवार को उपायुक्त विकास कुंडल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मनोचिकित्सक के बनी भेजने के निर्देश दिए।
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सित्ती हाई स्कूल पहुंचे मनोचिकित्सक डॉ. मुकुल उब्बट, बीएमओ बनी और बनी से गए डॉक्टरों के साथ-साथ बनी हायर सेकेंडरी स्कूल की उप प्रधानाचार्य और डाइट बसोहली के लेक्चरर ने भी बच्चों की काउंसिलिंग की। मनोचिकित्सक ने स्कूल के विद्यार्थियों और स्टाफ के साथ भी बातचीत की। बीएमओ बनी डॉ. बीएल चौधरी ने बताया कि मनोचिकित्सक ने पूरे मामले को जानने के बाद बताया है कि मामला मास हिस्टीरिया का है, जिसमें बच्चे देखा देखी ऐसा कर रहे हैं। किसी एक बच्चे के ऐसा व्यवहार करने के बाद बाकी बच्चे भी ऐसा व्यवहार करने लगते हैं। डॉक्टरों ने जांच में पहले ही पाया है कि बच्चों को किसी भी तरह की बीमारी नहीं है। उन्हें काउंसिलिंग की जरूरत थी जो मुहैया कराई गई है और आने वाले दिनों में भी मुहैया कराई जाएगी।
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क्या है मामला
14 जनू को बनी से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर स्थित सित्ती हाई स्कूल के लगभग चालीस से अधिक बच्चे अजीब व्यवहार करते नजर आए। एक-एक कर स्कूल के दर्जनों विद्यार्थी खासकर छात्राएं अजीब व्यवहार करने लगीं, जिसे देखकर शिक्षक भी सकते में आ गए। यहां तक कि कुछ शिक्षकों ने भी वैसा ही व्यवहार करना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि छात्राएं ऐसा व्यवहार कर रही थीं जैसे तड़प रही हों। कक्षा के भीतर से लेकर बाहर स्कूल के मैदान में भी विद्यार्थी जमीन पर लोटते और कांपते नजर आए। आनन-फानन में स्कूल स्टाफ ने मुख्य शिक्षा अधिकारी के साथ-साथ एसडीएम बनी को सूचित किया, जिसके बाद एसडीएम बनी जोगिंद्र सिंह जसरोटिया मेडिकल टीम के साथ स्कूल पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला मास हिस्टीरिया का लग रहा है। मेडिकल टीम की जांच में भी बच्चों को किसी तरह से बीमार नहीं पाया गया था, जिसके बाद अगले दिन भी मेडिकल टीम को मौके पर भेजा गया था।
स्थानीय लोगों ने बताया कि 10 जून को भी स्कूल में ऐसा ही मामला हुआ था, जब स्कूल की छात्राएं अजीब व्यवहार कर रही थीं। उसके दो दिन बाद अजीब व्यवहार करने वाले विद्यार्थियों का आंकड़ा बढ़ना शुरू हो गया। स्कूल स्टाफ के लिए भी बच्चों को संभाल पाना मुश्किल हो गया। 14 जून को मामला और भी बिगड़ गया। जब सबसे पहले नौंवी कक्षा की एक छात्रा और उसके बाद देखते ही देखते सभी कक्षाओं में दर्जनों छात्राएं अजीब व्यवहार करने लगीं। कुछ छात्राएं नाचती रहीं तो कुछ जमीन पर लेटकर तड़पती रहीं। इस भयावह नजारे के बीच स्कूल स्टाफ भी छात्राओं को नियंत्रित करने में असहाय साबित हुआ। आखिरकार झाड़ फूंक का भी स्कूल में सहारा लिया गया, जिसके बाद बच्चों को घर भेज दिया गया। 18 जून को स्कूल में चालीस से भी कम विद्यार्थी पहुंचे तो वहीं इसके बाद धीरे-धीरे विद्यार्थियों के स्कूल पहुंचने का आंकड़ा बढ़ना शुरू हुआ।
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बुधवार और वीरवार को भी अजीब व्यवहार करते रहे कुछ बच्चे
19 और 20 जून को भी सित्ती हाई स्कूल में बच्चों के अजीब व्यवहार करने के मामला सामने आए। प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों में से तीन छात्राओं और एक छात्र को अजीब व्यवहार करते पाया गया। आनन-फानन में स्कूल स्टाफ ने ऐसा व्यवहार करने वाले चारों विद्यार्थियों को अलग-अलग कमरों में रखा, जिसके आधे घंटे बाद हालात सामान्य हो गए। वीरवार को भी स्कूल में एक छात्रा को अजीब व्यवहार करते पाने पर स्कूल प्रबंधन ने उसके अभिभावकों को सूचित किया। हालांकि पता चला है कि छात्रा के परिजनों ने बताया कि वो पहले भी ऐसा व्यवहार कभी-कभी करती रही हैं। विज्ञान की दृष्टि में भले ही मामले को मनोविज्ञान से जोड़कर देखा जा रहा हो लेकिन इलाके में दहशत बढ़ चुकी है और लोगों में अंध विश्वास भी अफवाहों की तरह बढ़ता जा रहा है।
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हाई स्कूल सित्ती में शुक्रवार को पहुंचे मनो चिकित्सक डॉ. मुकुल उब्बट ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले पर स्कूल स्टाफ, विद्यार्थियों से जानकारी ली। पता चला कि डेढ़ माह पहले दो से तीन छात्राओं को इसी तरह से दिक्कत आई थी और वो स्कूल में ही लगभग दो ढाई घंटे तक बेहोश भी हो गई थीं। यह भी जानकारी मिली कि उन्होंने पठानकोट में इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन किसी बीमारी का पता नहीं चल पाया था। स्कूल में पूछताछ के दौरान पता चला कि ठीक एक माह बाद उन छात्राओं को दोबारा चौकी आने और चीखने चिल्लाने जैसी शिकायत हुई। देखा देखी लगभग 20 छात्राएं भी ऐसा ही महसूस करने लगीं। 14 जनू को लगभग 50 बच्चों को ऐसी शिकायत सामने आई थी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की गई है और अंध विश्वास के चलते यह बात बढ़ती चली गई है। यह मास हिस्टीरिया का मामला है और देश के अन्य राज्यों में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। राज्य में चोटी कटने वाला मामला भी कुछ इसी तरीके का था। किसी भी जगह पर 20 से 25 फीसदी लोग मनोरोग के किसी न किसी तरीके से शिकार होते हैं। उन्हें इलाज की जरूरत होती है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण काउंसिलिंग है। इलाज के अभाव में जब वो कुछ भी हरकत करते हैं तो दूसरों में भय फैलता है और देखा देखी आसपास के लोग भी खुद को वैसा ही महसूस करने लगते हैं। स्कूल में मनोचिकित्सक का नंबर भी उपलब्ध कराया गया है ताकि किसी भी तरह की दिक्कत के समय उनसे परामर्श लिया जा सके। ऐसे में जरूरी है कि जिन छात्राओं को पहले दिक्कत हुई थी वो अपना इलाज कराएं, लेकिन गांव पहुंचने पर उनसे भी संपर्क नहीं हो पाया है। यह भी देखा गया है कि गांव के लोग झाड़ फूंक और पूजा पाठ में ज्यादा विश्वास कर रहे थे जिससे डर बढ़ता चला गया है।

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