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बिजली बंद तो सब बंद- यह है जीएमसी कठुआ के एसोसिएट अस्पताल का हाल

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Mon, 13 May 2019 12:59 AM IST
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कठुआ। करोड़ों रुपये की इमारत और हाल ही में जीएमसी कठुआ के एसोसिएट अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद भी जिला अस्पताल कठुआ (जीएमसी कठुआ के एसोसिएट अस्पताल) का हाल बेहाल ही है। रविवार को ऐसी घटना सामने आई जिसने सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बेहतर तरीके से काम करने और बेहतरीन सुविधाओं के दावों की पोल खोल दी। एसोसिएट अस्पताल में दो घंटे तक सड़क हादसे में घायल लोग तड़पते हुए डाक्टरों को ढूंढते रहे और उन्हें कोई इलाज नहीं मिला। इलाज के नाम पर केवल हल्की सी मरहम पट्टी और एक्स-रे नाम पर बार-बार चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ा। क्योंकि अस्पताल में बिजली बंद थी। इसके बाद घायलों के परिजनों ने हंगामा कर दिया। करीब दो घंटे के बाद घायलों ने खुद ही जीएमसी जम्मू जाने का फैसला कर लिया। अस्पताल से मिन्नतें करने के बाद उन्हें एंबुलेंस सुविधा मिली।
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दरअसल जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार की दोपहर एक बस ने वैन को उस समय टक्कर मार दी जब वैन में सवार एक ही परिवार के सात लोग दरबार साहिब अमृतसर में नई वैन लेकर माथा टेकने के लिए जा रहे थे। इस हादसे में चार लोगों को गंभीर चोटें आई। घायलों की पहचान एक वर्षीय मनजोत कौर, 30 वर्षीय रविंद्र सिंह, 50 वर्षीय कौशल्या कौर और 55 वर्षीय हरभजन सिंह निवासी ओल्ड जानीपुर के रूप में हुई है। हल्की खरोचों के साथ दो ओर लोग भी अस्पताल पहुंचे तो वहां पर मौजूद पैरा मेडिकल स्टाफ के सदस्यों ने उन्हें हल्की मरहम पट्टी की। जब डाक्टर के लिए पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला। घायलों ने बताया कि उन्हें कहा गया कि डाक्टर चाय पीने गए हैं। उन्होंने जब जोर दिया तो बताया कि आज छुट्टी है और डाक्टर कल आएंगे आप कल आना। एक्स-रे के लिए जब वह भटकने के बाद बाहर पहुंचे तो बिजली नहीं थी। घायल अवस्था में व्हील चेयर पर बैठी घायल ने जब पूछा कि एक्स-रे करवाना है तो बताया कि बाजू, सिर का हो जाएगा, लेकिन पीठ का नहीं होगा। क्योंकि इसके लिए रूम में व्यवस्था नहीं है। उस पर बिजली भी करीब आधा घंटा बंद रही। घायलों ने जब बिजली के बारे में पूछा तो बताया गया कि जब बिजली बंद होती है तो कोई भी सुविधा नहीं होती। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड भी बंद रहता है। इसके बाद घायलों ने फिर आपातकालीन कक्ष की ओर रुख किया, लेकिन दो घंटे के बाद भी कोई डाक्टर नहीं पहुंचा था। परिजनों ने हंगामा किया और उन्हें रेफर करने की मांग की, लेकिन उन्हें रेफर भी नहीं किया जा रहा था। किसी ने अस्पताल के अधीक्षक को फोन किया तो वह अस्पताल पहुंचे। घायलों ने उन्हें घेर लिया और काफी बहसबाजी भी हुई। घायलों ने कहा कि उन्हें रेफर किया जाए, लेकिन अधीक्षक उन्हें इलाज देने के लिए कहने लगे। मरीजों ने कहा कि दो घंटे से उन्हें किसी ने नहीं देखा वह इस अस्पताल में अपना इलाज कराएंगे ही नहीं। हल्की ही मरहम पट्टी ही करनी थी तो वह कार के फर्स्ट एड किट से ही कर सकते थे। इसके बाद घायलों के परिजनों ने उन्हें खुद की कार में बिठाया। मामला बिगड़ते देख उन्हें आनन फानन में एक एंबुलेंस प्रदान की गई।
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क्या कहते हैं अधीक्षक
मामले की जैसे ही जानकारी मिली। मैंने संबंधित डाक्टरों केे फोन किया। बिजली बंद हो गई थी, जिसके बाद जेनरेटर चलाया गया। उसे चलाने में पंद्रह बीस मिनट का समय लगता है। जहां तक स्टाफ की ओर से डाक्टर के न होने या घायलों केे कल आने की बात कहने का मामला है इसकी जांच की जाएगी। सोमवार को ही कमेटी बनाई जाएगी और इसका कड़ा संज्ञान लिया जाएगा।
-डा. एसके वर्मा
बिजली विभाग के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा
वार्ड-18 के निवासियों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ। शहर के वार्ड-18 में बिजली व्यवस्था और मीटरिंग को लेकर लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिजली के खंभे गलियों के बीच में लगे हुए हैं और बार बार विभाग से अनुरोध करने के बाद भी उन्हें नहीं हटाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे जोगिंदर पाल ने बताया कि वार्ड-18 के चौराहे में एक खंभा लगा हुआ है, जिससे गाड़ियों को मोड़ने में परेशानी होती है। बार-बार मांग करने के बाद भी उस खंभे को नहीं हटाया जा रहा है। इसके साथ ही कुछ गलियों के अंदर भी पोल गली के दो-दो फीट अंदर लगे हुए हैं, जिस कारण से न तो वहां पर कोई गाड़ी जा सकती है और दोपहिया वाहन निकालने में भी दिक्कत आ रही है। इनके बारे में बताने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिलते हैं, लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती। उन्हें बताया कि उन्हें पता चला है कि विभाग मीटिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का स्वागत करते हैं लेकिन विभाग को चेतावनी देना चाहते हैं कि वह एक तय मानकों के अनुसार ही काम करें। विशेष वार्ड को टारगेट ना करें।
उन्होंने कहा कि शहर में कुल 21 वार्ड नंबर 1 से मीटरिंग की प्रक्रिया शुरू की जाए और उसके बाद सभी वार्डों में मीटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में अभी तक केबल नहीं लगाई गई है और जिन स्थानों पर लगाई गई है उसकी ऊंचाई काफी कम है जिस कारण से गाड़ियां केबल के साथ लग सकती है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग को इन परेशानियों की ओर भी ध्यान देना चाहिए और अगर विभाग ऐसा नहीं करता है तो आने वाले समय में उन्हें रुख अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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