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लद्दाख पहुंचे सैन्य प्रमुख : एलएसी की अग्रिम चौकियों पर जवानों से की मुलाकात, समग्र सैन्य तैयारियों की ली जानकारी

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 15 May 2022 12:39 AM IST
सार

सैन्य प्रवक्ता के अनुसार सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने परिचालन तैयारियों की समीक्षा के लिए लद्दाख में अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने ऊंचाई वाले क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ कई स्थानों पर सैनिकों के साथ बातचीत की और जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

लद्दाख में जवानों से मिलते आर्मी चीफ मनोज पांडे
लद्दाख में जवानों से मिलते आर्मी चीफ मनोज पांडे - फोटो : पीआरओ
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विस्तार

सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने अपने पहले तीन दिवसीय दौरे के आखिरी दिन शनिवार को पूर्वी लद्दाख में सबसे कठिन और दुर्गम अग्रिम स्थानों का दौरा किया। चीन के साथ सीमा विवाद के बीच उन्होंने भारत की समग्र सैन्य तैयारियों की समीक्षा की।

सैनिकों के साथ बातचीत की और जमीनी स्थिति का जायजा लिया

उन्होंने ऊंचाई वाले क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ कई स्थानों पर सैनिकों के साथ बातचीत की और जमीनी स्थिति का जायजा लिया। सैन्य प्रवक्ता के अनुसार उन्होंने परिचालन तैयारियों की समीक्षा के लिए लद्दाख में अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया।

पूर्वी लद्दाख में समग्र सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी

सैनिकों के साथ बातचीत कर उनकी दृढ़ता और उच्च मनोबल के लिए सराहना की। इससे पहले लेह में फायर एंड फ्यूरी कोर मुख्यालय में जनरल पांडे को पूर्वी लद्दाख में समग्र सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी गई।जनरल पांडे का यह दौरा उनके बयान कि चीन का इरादा भारत के साथ समग्र सीमा संबंधी मुद्दे को जीवित रखना है के कुछ दिनों बाद हुआ है।

यथास्थिति बहाल करने को प्रतिबद्ध

कहा था कि भारतीय सेना का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विश्वास और शांति को फि र से स्थापित करना है, लेकिन यह एकतरफा मामला नहीं हो सकता। भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 से पहले यथास्थिति बहाल करने को प्रतिबद्ध है।

दोनों क्षेत्र में एलएसी पर 50 से 60 हजार सैनिक तैनात
ज्ञात हो कि भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख विवाद को सुलझाने के लिए अब तक 15 दौर की सैन्य वार्ता की है। परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट और गोगरा क्षेत्र में जवानों को हटा लिया था। भारत लगातार इस बात पर कायम रहा है कि एलएसी पर शांति और शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों क्षेत्र में एलएसी पर 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं। 

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