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जयपुर

रविवार, 29 मार्च 2020

राजस्थान : जयपुर में कश्मीरी किशोर की साथी ने पीट-पीट कर की हत्या, एक गिरफ्तार

कैटरिंग कंपनी में काम करने वाले 17 वर्षीय किशोर को उसके साथियों ने छोटी सी बात पर इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। घटना बुधवार रात की है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामले की जांच की जा रही है। 

जयपुर के पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने बताया, मारा गया किशोर बासित जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा का रहने वाला था। बुधवार रात को वह आरोपी आदित्य (24) के साथ एक शादी समारोह से लौट रहा था। दोनों एक पिक अप वैन में सवार थे। इस दौरान वैन की खिड़की बंद करने को लेकर बासित और आदित्य में हाथापाई होने लगी। 

इस दौरान वहां मौजूद बाकी लोगों ने बीच बचाव कराया। घर पहुंचने पर बासित को उल्टी होने लगी और उसके दोस्त ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवारवालों को सौंप दिया गया है।  

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सगाई समारोह में 11 साल की बच्ची से दुष्कर्म, 600 लोगों को गार्डन में बंद कर हुई जांच, आरोपी गिरफ्तार

सगाई समारोह के दौरान 11 साल की बच्ची दरिंदे की हैवानियत की शिकार हो गई। दुष्कर्म की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामला जयपुर के मुरलीपुरा स्थित मैरिज गार्डन में सगाई समारोह के दौरान हुआ। दरिंदे ने 11 साल की बच्ची से दुष्कर्म किया। पुलिस ने एफएसएल टीम की मदद से आरोपी की पहचान की। टीम ने समारोह में शामिल, रिश्तेदार समेत 600 लोगों को गार्डन में बंद कर जांच शुरू की। सोमवार को करीब 15 घंटे तक चली जांच में मुख्य आरोपी पकड़ा गया। आरोपी के कपड़ों पर मासूम के खून के दाग मिले मिला।

सूचना मिलते ही डीसीपी पहुंचे घटनास्थल 
सगाई समारोह में मासूम से दुष्कर्म की सूचना मिलते ही डीसीपी मैरिज गार्डन पहुंचे। डीसीपी कावेन्द्र सिंह सागर, एडिशनल डीसीपी प्रकाश चंद शर्मा, एसीपी प्रमोद स्वामी आदि अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनाई गईं। सभी को फुटेज व रिकॉर्डिंग खंगालने पर लगाया गया। इसके बाद एफएसएल ने गार्डन में काम करने वाले 50 वर्कर समेत समारोह में शामिल 600 लोगों को गार्डन में बंद करवा दिया। सभी को कमरे में बुलाकर गहनता से जांच कराई। सोमवार को करीब 15 घंटे बाद आरोपी की पहचान हो गई। आरोपी के कपड़े पर मासूम के खून के दाग मिले।

तिलक लगाकर नाटक करने लगा आरोपी 
पुलिस ने बताया कि आरोपी राजू जयपुर में परिवार के साथ रहता है। उसकी 11 साल की बेटी भी है। वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की गई तो सामने आया कि घटना के वक्त आरोपी लगभग 15 मिनट तक गायब था। इसके बाद खुद को फंसने की भनक लगते ही आरोपी बाहर गया और माथे पर तिलक लगाकर नाटक करने लगा कि वह बालाजी का भक्त है।

दरिंदे की हैवानियत का पता चलते ही माता-पिता अचेत 
समारोह के दौरान काफी देर तक बच्ची का पता नहीं चलने पर उसकी तलाश शुरू हुई। चाची की नजर अचानक लहूलुहान बच्ची पर पड़ी। पहले तो सभी ने सोचा कि फिसल कर गिर गई होगी। आनन-फानन में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सक ने जांच किया तो दरिंदे की हैवानियत का मामला सामने आया। चिकित्सक ने दुष्कर्म का मामला बताया तो माता-पिता अचेत हो गए। परिजनों ने दरिंदे को सख्त सजा देने की मांग की है।
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कोरोना की आशंका में चीन से लौटी युवती का पटना के PMCH तो जयपुर के SMS अस्पताल में युवक का इलाज जारी

राजस्थान के भीलवाड़ा अस्पताल में 24 घंटे ड्यूटी में लगे डॉक्टरों का ये गाना हो रहा वायरल

डॉक्टरों का वीडियो वायरल डॉक्टरों का वीडियो वायरल

गुलाबी नगरी ही क्यों बन रही संकट के दौरान विधायकों को ठहराने की पसंदीदा जगह, पढ़ें यह खबर

गुलाबी नगरी 'जयपुर' पर्यटकों के अलावा उन राजनेताओं के लिए भी पसंदीदा जगह बन गया है, जो उस वक्त यहां लाकर ठहराए जाते हैं, जब किसी राज्य में 'सत्ता की कुर्सी' हिलने लगी हो। ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश का है। कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन कर ली है और मध्यप्रदेश के अनेक कांग्रेसी विधायकों को जयपुर के एक होटल में लाकर बैठा दिया गया है। इससे पहले जब भाजपा की वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं, तो गोवा और झारखंड के कुछ विधायकों को गुलाबी नगरी में लाया गया था।
 
मध्यप्रदेश के ताजा प्रकरण में वहां के विधायकों को तीन जगहों पर भेजा गया है। भाजपा के सभी विधायक हरियाणा के गुरुग्राम में ठहरे हैं। कांग्रेस पार्टी के अधिकांश विधायक जयपुर में पहुंच गए हैं। भाजपा ज्वाइन करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक कई कांग्रेसी विधायक बेंगलुरु के होटल में बताए जा रहे हैं।

नवंबर 2019 में जब महाराष्ट्र में सत्ता का जोड़ तोड़ चल रहा था तो कांग्रेस पार्टी ने सभी 44 विधायकों को जयपुर में भेज दिया था। महाराष्ट्र के सभी कांग्रेसी विधायक कई दिनों तक कथित तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मेहमान बन कर रहे थे। ऐसी परिस्थितियों में विधायकों के आने-जाने और ठहरने का सारा इंतजाम मुख्यमंत्री को ही करना पड़ता है।

विधायकों के लिए आलीशान होटल या रिसोर्ट, क्या ठीक रहेगा, ये सब मुख्यमंत्री तय करते हैं। इतना ही नहीं, सबसे बड़ी जिम्मेदारी जो अंदरखाने मुख्यमंत्री को ही निभानी होती है, वह है विधायकों की सुरक्षा।

विधायकों पर लगी रहती है 'तीसरी आंख'

हरियाणा में तैनात एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि ऐसे मामले आते रहते हैं। बड़ी सीधी सी बात है कि वह पार्टी अपने विधायकों को उसी राज्य में भेजेगी, जहां पर उसे सौ फीसदी यह भरोसा रहता है कि वहां उनके विधायक पूरी तरह महफूज रहेंगे। इस मुहिम में संबंधित राज्य के खुफिया महकमे और पुलिस की सबसे ज्यादा भागदौड़ रहती है।

जब यह खबर आती है कि फलां राज्य से इतने विधायक आ रहे हैं तो मुख्यमंत्री यह तय करते हैं कि उन्हें कहां ठहराया जाएगा। विधायकों के होटल में आने से पहले खुफिया महकमा और उच्च स्तर के अफसर, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय सीधे तौर पर शामिल रहता है, वे यह बताते हैं कि कौन सा विधायक किस कमरे में ठहरेगा।

क्या एक कमरे में दो विधायकों को ठहराया जाए, विधायक के कमरे में फोन सुविधा देनी है या नहीं, मोबाइल फोन को जैमर के जरिए निष्क्रिय बनाना है या उन्हें विधायकों से लेकर जमा कर देना है, किसी के पास कोई खुफिया कैमरा तो नहीं है, होटल के चप्पे-चप्पे पर कितनी फोर्स तैनात रहेगी, ये सब कार्रवाई बहुत गोपनीय तरीके से पूरी होती है।

होटल के स्टाफ में कौन-कौन रहेगा, यह भी पुलिस विभाग तय करता है। होटल के गेट पर स्टाफ की चेकिंग की जाती है। किसी भी व्यक्ति को विधायकों से मिलने नहीं दिया जाता। संबंधित जिले का सीएमओ या अन्य कोई डॉक्टर, जिसे सीएम कार्यालय से हरी झंडी मिली हो, उससे ही विधायकों के स्वास्थ्य की जांच कराई जाती है।

अगर किसी विधायक का कोई बयान सोशल मीडिया में वायरल कराना है, तो उसके लिए भी ऊपर से मंजूरी लेनी पड़ती है।
 
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आठ मार्च को महिलाओं के हवाले रहेगी जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस की कमान महिला रेल कर्मियों के हवाले रहेगी। ट्रेन में आठ मार्च को पूरा महिला स्टाफ ही रहेगा। इसमें लोको पॉयलट, गार्ड, चेकिंग स्टाफ यहां तक कि सुरक्षा की बागडोर भी महिलाओं के ही जिम्मे रहेगी। ट्रेन प्रयागराज जंक्शन पहुंचेंगी तो यहां से भी महिला स्टाफ चढ़ेगा, जो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन तक जाएगी।

महिला दिवस के इस बार एनसीआर के  प्रयागराज मंडल में एक मार्च से ही मनाया जा रहा है, जो दस मार्च तक मनेगा। आठ मार्च को ही मुख्य आयोजन किया जाना है। इस दौरान जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के टूंडला पहुंचने के बाद उसकी कमान महिलाओं के हाथ में सौंप दी जाएगी। ट्रेन प्रयागराज आएगी तो यहां ट्रेन लेकर आने वालीं महिला स्टाफ का स्वागत होगा जबकि, जो महिलाएं यहां से दीन दयाल उपाध्याय ट्रेन लेकर जाएंगी, उन्हें भी सम्मानित किया जाएगा।

इस दौरान जंक्शन पर नुक्कड़ नाटक भी होगा। एनसीआर प्रयागराज मंडल के पीआरओ सुनील गुप्ता के मुताबिक मंडल में 1384 महिला रेलकर्मी तैनात हैं। इसमें 84 टिकट परीक्षक , 38 आरपीएफ , 31 लोको पॉयलट, 22 स्टेेशन मास्टर, 25 ट्रेन क्लर्क एवं अन्य प्रमुख पदों पर भी महिलाएं तैनात हैं।
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कोरोनावायरस: इटली के लोगों के संपर्क में आए दिल्ली, आगरा और जयपुर के कई लोग

भारत आए इटली के 21 लोग में से 16 को कोरोनावायरस होने की पुष्टि हो गई है। इनके साथ बतौर ड्राइवर बन कर रहे एक भारतीय की जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। अब स्वास्थ्य मंत्रालय को यह चिंता सता रही है कि ये लोग आईटीबीपी के छावला स्थित क्वारंटाइन केंद्र में आने से पहले कहां और कितने लोगों के संपर्क में रहे।

वहीं कोरोना वायरस से संक्रमित इतालवी पर्यटकों ने राजस्थान में 215 लोगों से मुलाकात की थी। यह संपर्क उनके यहां कई जगहों पर घूमने के दौरान बना था। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने विधानसभा में बताया कि इनमें से 93 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें 51 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। बाकी की रिपोर्ट आनी बाकी है।

उन्होंने कहा कि राज्य के पास ऐसी कोई सूचना नहीं थी कि उनकी स्क्रीनिंग हुई है या नहीं। पर्यटकों के घूमने की योजना को लेकर भी जानकारी नहीं थी। ये लोग दिल्ली, आगरा से जयपुर पहुंचे थे।

मंत्री ने बताया कि इतावली पर्यटक जयपुर में सबसे अधिक 76 लोगों के संपर्क में आए। इसके अलावा झुंझनू में 53, बीकानेर में 44, जोधपुर व जैसलमेर में 14-14 तथा उदयपुर में छह लोगों से मिले थे। पर्यटक 21 से 29 फरवरी तक राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए थे। राज्य सरकार ने इन सभी जिलों के कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को उन जगहों पर स्वास्थ्य रक्षा उपायों को अपनाने को कहा है जहां पर्यटक घूमे थे।

वहीं, जिन बसों में ये चले थे उनके ड्राइवर और क्लीनर को 14 दिनों के लिए घर में अलग-थलग रहने को कहा गया है। सरकार ने इन छह शहरों के उन होटलों ्ले कमरे सील कर दिए हैं जहां ये पर्यटक रुके थे। साथ ही इन होटलों में किसी अन्य व्यक्ति को कमरे न देने का निर्देश दिया गया है। इन पर्यटकों के संपर्क में आए होटल स्टाफ व अन्य लोगों को 28 दिन तक निगरानी में रखने का निर्देश दिया गया है।




 

राजस्थान सरकार आई एक्टिव मोड में  

राज्य की गहलोत सरकार ने झुंझनू, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर और जयपुर जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को उन जगहों पर स्वास्थ्य रक्षा उपायों को अपनाने को कहा है  जहां ये पर्यटक घूमने गए थे।

बस के ड्राइवर और क्लीनर को 14 दिनो के लिए घर में अलग थलग रहने के लिए कहा गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि उन कमरों में पर्यटकों के बाद कौन ठहरा था उनकी पूरी जानकारी ली जाए और उन लोगों के सेहत के बारे में जानकारी एकत्र हो।
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जयपुर: भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का जमीन समाधि सत्याग्रह

CoronaVirus Impact- Tajmahal Agra

भीलवाड़ा से लाई गई लेटे हनुमान की प्रतिमा की उतारी गई आरती

राजस्थान के भीलवाड़ा से लाई गई 64 टन की लेटे हनुमान की प्रतिमा का शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार से सविधि पूजन किया गया। लेटे हनुमान के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज ने जलाभिषेक किया। लेटे हनुमान की पूजा के बाद आरती उतारी। इस दौरान गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे।

लेटे हनुमान की विशालकाय प्रतिमा राजस्थान के भीलवाड़ा से 20 दिन बाद 2100 किमी दूसरी तय कर बृहस्पतिवार को यहां पहुंची। प्रतिमा लेकर यहां पहुंचने पर संतों-भक्तों ने भव्य स्वागत किया। लेटे हनुमान की विशालकाय मूर्ति के दर्शन के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। को देखने के लिए रास्तों में छोटे-छोटे समूह द्वारा पूजा अर्चना की गई श्रद्धालुओं की भीड़ विशालकाय मूर्ति को देखने के लिए प्रतीक्षा में खड़े रहे।

संगम क्षेत्र में बड़े हनुमान मंदिर परिसर केसामने भीलवाड़ा से लाई गई लेटे हनुमान की इस प्रतिमा की पूजा महंत नरेंद्र गिरि ने की। अब भीलवाड़ा पहुंचने के बाद वहां लेटे हनुमान केभव्य मंदिर की स्थापना होगी और उस मंदिर के गर्भगृह में इस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस मौके पर भीलवाड़ा के महंत बाबू गिरी महाराज ने बताया कि इस प्रतिमा को भीलवाड़ा में बनने वाले मंदिर में प्रतिष्ठापित किया जाएगा। इस मौके पर सैकड़ों संत व भक्त उपस्थित थे। 
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आगरा से जयपुर-अजमेर सफर करते हैं तो पढ़ लें नया रास्ता, ट्रंप दौरे के चलते यहां से मिलेंगी बसें

ईदगाह बस अड्डे से रोडवेज बसों का संचालन दोपहर 12 बजे से ही आईएसबीटी से शुरू कर दिया गया। हालांकि इसके बाद भी इक्का दुक्का बसें ईदगाह बस स्टैंड पहुंचती रहीं। दोपहर दो बजे बस स्टैंड को पूरी तरह खाली करा दिया गया। जयपुर, धौलपुर और दिल्ली जाने वाले यात्री बसों के लिए भटकते रहे। 

अमेरिका के राष्ट्रपति के आगमन के कारण ईदगाह बस अड्डे से बसों का संचालन 24 फरवरी को भी बंद रहेगा। यहां से जाने वाली बसें आईएसबीटी से चलेंगी। बिजलीघर से दिल्ली जाने वाली लगभग 10 बसें भी आईएसबीटी से होकर जाएंगी।

परिवहन निगम के अधिकारियों ने दोपहर 12 बजे से ही चालक, परिचालकों को बसों को ईदगाह नहीं लाने को कहा था, लेकिन दूसरे राज्यों के चालक, परिचालक बसों को लेकर ईदगाह बस स्टैंड आए, उन्हें भी दोपहर दो बजे बाहर निकाल दिया गया। बसों को पकड़ने के लिए कुछ यात्री भी ईदगाह बस स्टैंड पहुंचे मगर उन्हें बसें नहीं मिलीं। यहां तैनात कर्मचारी ने उन्हें आईएसबीटी से बस पकड़ने को कहा। 
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सिंधिया के रास्ते में नहीं आएंगी प्रियंका, वे भी नहीं लांघेंगे लक्ष्मण रेखा

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों चाहते हैं कि मध्यप्रदेश के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा के लिए चुनकर संसद भवन पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इसके खिलाफ नहीं है।

प्रियंका की टीम के एक सदस्य की मानें तो कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते में बिल्कुल नहीं आना चाहतीं। सूत्र बताते हैं कि ज्योतिरादित्य, प्रियंका और राहुल के बीच की केमिस्ट्री भी कुछ इसी तरह की है कि चाह कर भी ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघने के पक्ष में नहीं रहेंगे।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रियंका गांधी वाड्रा को राजस्थान से राज्यसभा में लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी यही चाहते हैं। सचिन पायलट और राजस्थान कांग्रेस संगठन भी इसके पक्ष में है।

हालांकि प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस की जमीन तैयार करने में पूरा ताकत लगा देने के पक्ष में हैं। बताते हैं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से कांग्रेस को राज्यसभा में आठ सीटें मिल सकती हैं। इसलिए कांग्रेस पार्टी भी संगठन के स्तर पर बड़ा भूचाल लाने के पक्ष में नहीं है।

क्या कहते हैं सिंधिया के करीबी

ज्योतिरादित्य के करीबी, उनके पिता माधवराव सिंधिया के जमाने से परिवार के शुभचिंतक का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से सिंधिया का अच्छा रिश्ता है। बताते हैं ग्वालियर-चंबल संभाग समेत मध्यप्रदेश के अनेक इलाकों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का खासा जनाधार है।

यदि वह कमलनाथ सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे, तो इसे संभाल पाना राज्य सरकार के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन सिंधिया फिलहाल लक्ष्मण रेखा लांघने से बचना चाहते हैं। इसकी वजह कांग्रेस के प्रति निष्ठा और राहुल प्रियंका के साथ दोस्ती के समीकरण हैं।

बताते हैं लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी प्रियंका गांधी अकसर ज्योतिरादित्य के आवास पर जाकर चुनाव अभियान को धार देती रही हैं। सूत्र का कहना है कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नेताओं के बीच में अपने राजनीतिक जमीन की लड़ाई है।

दो बड़े नेता अपने वारिसों के लिए राजनीति में षडयंत्र रच रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ के लिए तो दिग्विजय सिंह अपने बेटे के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। इसके चक्कर में सिंधिया के साथ केमिस्ट्री बिगड़ रही है।

कांग्रेस को अपनों से ही खतरा

ग्वालियर घराने से संपर्क रखने वाले एक अन्य सूत्र का कहना है कि वह चर्चा में नहीं आना चाहते। सच यह है कि कांग्रेस को अपने ही नेताओं से खतरा है। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर में सिंधिया को जिम्मेदारी देकर भेजा था, एक वादा भी किया था। कमलनाथ भी वहां जिम्मेदारी के साथ गए थे।

दिग्विजय सिंह ने भी राज्य में कांग्रेस सरकार बनवाने में कड़ी मेहनत की, लेकिन जब राज्य में सरकार बनने की स्थिति आई तो कमलनाथ का नाम आगे आया। सूत्र का कहना है कि तब ज्योतिरादित्य सिंधिया को खुद राहुल गांधी ने चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया था। चर्चा में प्रियंका गांधी शामिल हुई थीं।

राहुल गांधी की बात पर भरोसा करके ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री पद के दावे को छोड़ दिया था। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक वादा किया था, लेकिन अभी वह पूरा नहीं हो पाया।

आखिर कैसे युवा रहेंगे कांग्रेस के साथ

ज्योतिरादित्य पर कांग्रेस के अंदरखाने में चर्चा के दौरान बड़ा सवाल उभरकर आया कि आखिर युवा कांग्रेस पार्टी के साथ कैसे रहें? राजस्थान के एक बड़े नेता का कहना है कि कांग्रेस इस सवाल पर कोई काम नहीं कर रही है। पुराने नेताओं के षडयंत्र के आगे युवा नेता बेदम हो रहे हैं। सचिन पायलट नाराज थे, तो भंवर जितेन्द्र सिंह ने भी उन्हें मनाने में भूमिका निभाई थी।

राहुल गांधी के कुछ अन्य करीबी भी सचिन को मनाने आगे आए थे। लेकिन सचिन पायलट अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की एक फायर ब्रांड महिला नेता का कहना है कि आप अपने उत्तर प्रदेश को देख लीजिए। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजय कुमार उर्फ लल्लू बनाए गए हैं। लल्लू वहां लल्लू की तरह काम कर रहे हैं।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी हैं। वह रह-रहकर अधीरता खो देते हैं। चिंता की बात यह है कि सही लोग आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इतना ही नहीं पार्टी में सही निर्णय भी बहुत देर से हो रहा है। युवा का स्वभाव पार्टी के इस मिजाज के खिलाफ होता है।
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रेगिस्तान में 25 किमी तक पैदल चलेंगे ITBP के डीजी, 24 घंटे में चलेंगे 100 किमी

आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल 58 साल की आयु में एक बार फिर खास मिशन पर निकले हैं। मिशन के लिए जगह भी ऐसी चुनी है, जहां पर केवल रेत है और कहीं-कहीं कंटीली झाड़ियां देखने को मिल जाती हैं। उन्होंने अपने मिशन के तहत शुक्रवार को राजस्थान के रेगिस्तान में पैदल चलना शुरू कर दिया है।

वे बीकानेर जिले के मेहरासर से लेकर जोधपुर के एक खुले इलाके तक 100 किलोमीटर लंबा रूट तय करेंगे। इस रूट का 25 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह रेगिस्तानी और रेतीला है। करीब 40 किलोमीटर की दूरी हार्ड मेटल रोड पर तय की गई जाएगी। डीजी देसवाल इस दूरी को 24 घंटे में पूरा करेंगे।

इस स्पीड मार्च शुरू करने के पीछे उनके तीन मकसद हैं। पहला, लोग पर्यावरण को समझें और उसके संरक्षण के लिए आगे आएं। दूसरा, फिट इंडिया मूवमेंट को तेजी से आगे बढ़ाना और तीसरा, डेजर्ट टूरिज्म की खूबसूरती को दुनिया के सामने रखना।
 
आईटीबीपी के मुताबिक, इससे पहले भी देसवाल कई बार इस तरह के मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। वहां भी उनके ये तीनों मकसद साथ रहे हैं। उन्होंने 12 महीनों में बतौर आईटीबीपी महानिदेशक, एक दर्जन से भी ज्यादा लंबे रूट वाले मार्च और स्पीड मार्च में भाग लिया है।

इस तरह के मिशन में उनके साथ आईटीबीपी के कई अफसर और जवान भी साथ रहते हैं। हिमाचल प्रदेश में स्थित भृगु लेक, अमरनाथ यात्रा रूट, लिपुलेख दर्रा, हिमाचल प्रदेश की सांगला वैली, मसूरी, औली तपोवन, पुरी कोणार्क सी-बीच, गंगोत्री-गौमुख तपोवन, धनुषकोडी, अलवर और बीकानेर-जोधपुर के बीच देसवाल ने कई स्थानों पर मार्च किया है।

वे हिमालय में हाई एल्टीट्यूड वाले ऐसे इलाके, जहां पर 18000 फीट से अधिक ऊंचाई रहती है, वहां भी उन्होंने सफलता के साथ सभी मिशन पूरे किए हैं। अपने इस मिशन के तहत वे बहुत से लोगों के साथ बातचीत करते हैं। कौन से इलाके में ऐसे क्या काम हो सकते हैं, जिनकी मदद से पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके, इस बाबत वे लोगों से सुझाव लेते हैं और उन्हें अपनी बात भी बताते हैं।

जैसे कहीं पर भू-जल का स्तर नीचे जा रहा है तो उसके लिए क्या किया जाए। हरियाली बढ़ानी है, प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल, पानी बचाने के लिए प्राकृतिक साधनों को सुरक्षित रखना और संबंधित इलाके को टूरिज्म के लिहाज से विकसित करना, आदि मुद्दों पर बातचीत होती है।

इतना ही नहीं, वे लोगों को फिटनेस का संदेश देना नहीं भूलते। किस तरह से लोगों का जीवन स्वस्थ बना रह सकता है, इसके लिए भी लोगों को कई अहम सुझाव दिए जाते हैं।
 
गत वर्ष देसवाल ने लिपुलेख दर्रा पहुंचकर स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाया था। वहां पर कूड़े का निस्तारण कैसे हो, इस बाबत कई तरह के उपायों पर चर्चा की गई। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2019 के अवसर पर उन्होंने 14000 फीट की ऊंचाई पर पैंगोंग झील पर पहुंच कर आईटीबीपी जवानों के साथ योगाभ्यास किया था।

आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक कुमार पांडे का कहना है कि महानिदेशक एसएस देसवाल इस तरह के अभियान में चार से पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। बीच राह में वे प्लास्टिक का निस्तारण करना नहीं भूलते। उनकी इस मुहिम से न सिर्फ जवानों का हौंसला बढ़ता है, बल्कि उन्हें फिट रहने का संदेश भी मिलता है।

बीकानेर जिले के मेहरासर से जोधपुर के एक खुले इलाके तक 100 किलोमीटर का रूट, जिस पर देसवाल ने चलना शुरू किया है, यह मार्च इसलिए विशेष है क्योंकि इसमें 25 किलोमीटर का रूट रेगिस्तानी और रेतीला है। इस दूरी को एक दिन में पूरा किया जाएगा।
 
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