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देश में हर साल विदेश से आता है एक लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Sep 2019 04:33 PM IST
भारत में प्लास्टिक से हो रहा प्रदूषण
भारत में प्लास्टिक से हो रहा प्रदूषण - फोटो : File
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खास बातें

  • 903 करोड़ टन प्लास्टिक मौजूद है पृथ्वी पर, जो कि 110 हाथियों के भार के बराबर है। 
  • इतने प्लास्टिक से 9 एफिल टॉवर खड़े किए जा सकते हैं। 
  • 1.3 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा हर साल सीधे समुद्रों में गिराया जा रहा है।
  • 1 लाख करोड़ प्लास्टिक बैग हर वर्ष उपयोग हो रहे हैं। 
  • 150 प्लास्टिक बैग हर व्यक्ति पर है यदि प्लास्टिक बैग का औसत निकाला जाए तो।
  • 8 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन प्लास्टिक निर्माण में हो रहा है खर्च।
दशकों पहले लोगों की सुविधा के लिये प्लास्टिक का आविष्कार किया गया लेकिन धीरे-धीरे यह अब पर्यावरण के लिये ही नासूर बन गया है। प्लास्टिक और पॉलीथीन के कारण पृथ्वी और जल के साथ-साथ वायु भी प्रदूषित होती जा रही है। हाल के दिनों में मीठे और खारे दोनों प्रकार के पानी में मौजूद जलीय जीवों में प्लास्टिक के केमिकल से होने वाले दुष्प्रभाव नजर आने लगे हैं। इसके बावजूद प्लास्टिक और पॉलीथीन की बिक्री में कोई कमी नहीं आई है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर प्लास्टिक और उससे बनने वाले कचरे के नुकसान के बारे में देशवासियों को बताया। उन्होंने सिंगल टाइम यूज प्लास्टिक (एक बार उपयोग किया जाने वाला) का उपयोग बंद करने की बात कही। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि हमारे देश में कितना प्लास्टिक कचरा निकलता है। देश-दुनिया में प्लास्टिक की क्या स्थिति है। प्लास्टिक का कितना कचरा जमा है और कितना खपाया जा चुका है।

पिछले 50 वर्ष में हमने अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा उपयोग किया है तो वो है प्लास्टिक। इतना ज्यादा उपयोग किसी भी अन्य वस्तु का नहीं किया गया है। 1960 में दुनिया में 50 लाख टन प्लास्टिक बनाया जा रहा था। आज यह मात्रा बढ़कर 300 करोड़ टन के पार हो चुकी है। यानी लगभग हर व्यक्ति के लिए करीब आधा किलो प्लास्टिक हर वर्ष बन रहा है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना 56 लाख टन प्लास्टिक का कूड़ा बनता है। दुनियाभर में जितना कूड़ा हर साल समुद्र में बहा दिया जाता है उसका 60 प्रतिशत हिस्सा भारत डालता है। प्रत्येक भारतीय रोजाना 15000 टन प्लास्टिक को कचरे के रूप में फेंक देते हैं। प्लास्टिक प्रदूषण के कारण पानी में रहने वाले करोड़ों जीव-जंतुओं की मौत हो जाती है।

यह धरती के लिए काफी हानिकारक है। दुनियाभर के विशेषज्ञ कहते हैं कि जिस रफ्तार से हम प्लास्टिक इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे वर्ष 2020 तक दुनियाभर में 12 अरब टन प्लास्टिक कचरा जमा हो चुका होगा। इसे साफ करने में सैकड़ों साल लग जाएंगे।

विदेश से भी आता है प्लास्टिक का कचरा

दुनिया के 25 से ज्यादा देश अपना 1,21,000 मीट्रिक टन कचरा किसी न किसी रूप में भारत भेज देते हैं। इस प्लास्टिक को रीसाइकिल करने के बाद भारत भेजा जाता है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि सरकार को प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहिए। हमारे देश में 55,000 मीट्रिक टन प्लास्टिक का कचरा पाकिस्तान और बांग्लादेश से आयात किया जाता है। इसे आयात करने का मकसद रीसाइक्लिंग करना है। इन दोनों देशों के अलावा मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका से भी इस प्रकार का कचरा आता है।

प्लास्टिक की शुरुआत

भारत में प्लास्टिक का प्रवेश 60 के दशक में हुआ था। आज इसको लेकर अजीब-सा विवाद बना हुआ है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक है लेकिन इसके पक्षधरों का दावा है कि यह 'इको फ्रेंडली' यानी पारिस्थितिकी संगत है क्योंकि यह लकड़ी और कागज का उत्तम विकल्प है। वास्तव में देखा जाए तो प्लास्टिक अपने उत्पादन से लेकर इस्तेमाल तक सभी अवस्थाओं में पर्यावरण और समूचे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक है। क्योंकि इसका निर्माण पेट्रोलियम से प्राप्त रसायनों से होता है।

इसलिए पर्यावरणविदों का मानना है कि प्लास्टिक से निकली हुई जहरीली गैस स्वास्थ्य के लिए एक अन्य खतरा है। इसके उत्पादन के दौरान व्यर्थ पदार्थ निकलकर जल स्रोतों में मिलकर जल प्रदूषण का कारण बनते हैं। इसके अलावा गौरतलब तथ्य यह भी है कि इसका उत्पादन ज्यादातर लघु उद्योग क्षेत्र में होता है जहां गुणवत्ता नियमों का पालन नहीं हो पाता।
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प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में यह जानिए

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