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क्या पटाखों की वजह से दिल्ली में फैल रहा है प्रदूषण, या कुछ और है वजह

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 09 Nov 2018 02:05 PM IST
Delhi NCR Pollution
Delhi NCR Pollution - फोटो : PTI
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भारत की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खराब बना हुआ है। दिवाली के दौरान हुई आतिशबाजी ने इस प्रदूषण को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। शुक्रवार को हवा की गुणवत्ता नापने का सूचकांक 600 के पार पहुंच गया जिसे 50 से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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प्रदूषण की इस स्थिति को लेकर पहले भी चिंता जाहिर की गई थी। पिछले साल की तरह इस साल भी भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री में कमी लाने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट के आदेश का असर कम ही दिखा।

लेकिन दिल्ली समेत हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए दिवाली के पटाखे कितने जिम्मेदार हैं?

कुछ अध्ययन बताते हैं कि दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण में कुछ खतरनाक तत्व तेजी से बढ़ जाते हैं। लेकिन इन अध्ययनों में ये भी माना गया है कि वायु की खराब गुणवत्ता के लिए कुछ अन्य कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
  • हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण भारत के लिए एक बढ़ती हुई समस्या बन गया है।
  • राजधानी दिल्ली में अक्तूबर की शुरुआत से लेकर दिसंबर तक स्मॉग का आतंक बना रहता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की हाल ही में जारी 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट में भारत के नौ शहरों को रखा है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन शहरों में पीएम 2।5 की सालाना सघनता सबसे ज्यादा है।
  • पीएम 2.5 प्रदूषण में शामिल वो सूक्ष्म संघटक है जिसे मानव शरीर के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है।

PM 2.5 क्या होता है?
  • PM यानी पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण की एक किस्म है। इसके कण बेहद सूक्ष्म होते हैं जो हवा में बहते हैं।
  • पीएम 2.5 या पीएम 10 हवा में कण के साइज को बताता है।
  • आम तौर पर हमारे शरीर के बाल PM 50 के साइज के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि PM 2.5 कितने बारीक कण होते होंगे।
  • 24 घंटे में हवा में PM 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए।
  • इससे ज्यादा होने पर स्थिति खतरनाक मानी जाती है। इन दिनों दोनों कणों की मात्रा हवा में कई गुना ज्यादा है।
  • हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते है। इससे शरीर में कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांसों की दिक्कत हो सकती है।
  • बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बूढ़ों के लिए ये स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है।
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प्रदूषण के कारण

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