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राज्य बनाम केंद्र: ममता-मोदी की तकरार में पिस गए अलपन, हो सकती है दो साल की जेल, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 02 Jun 2021 12:38 PM IST

सार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल के पूर्व सचिव बंदोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी कर 72 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा है। नोटिस में पूछा है कि उनके विरुद्ध आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 की धारा 51 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
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पीएम मोदी, अलपन बंद्योपाध्याय और ममता बनर्जी
पीएम मोदी, अलपन बंद्योपाध्याय और ममता बनर्जी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

केंद्र बनाम राज्य की जंग खत्म होती नहीं दिख रही है। ममता और मोदी की तरकरार में बंगाल के पूर्व सचिव अलपन बंदोपाध्याय पिस गए। बंगाल के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए अलपन बंदोपाध्याय के मुख्यमंत्री ममता के सलाहकार बनने के चंद घंटे बाद ही उन्हें केंद्र की तरफ से कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। इस नोटिस में पूर्व सचिव बंदोपाध्याय को 72 घंटे का वक्त देते हुए केंद्र ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके विरुद्ध आपदा प्रबंधन ऐक्ट 2005 की धारा 51 के तहत ऐक्शन क्यों न लिया जाए। इस प्रावधान के तहत दो साल तक की कैद हो सकती है।
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सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद ही बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव और ममता बनर्जी के सलाहकार अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र सरकार की ओर से कारण बताओ नोटिस करने पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि यह कदम टिकने वाला नहीं है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना था कि सेवा नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इस प्रावधान के तहत दो साल तक की कैद हो सकती है।


कानूनी कसौटी पर टिकने वाला नहीं है नोटिस
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि कारण बताओ नोटिस कानूनी कसौटी पर टिकने वाला नहीं है। वहीं त्रिपुरा के महाधिवक्ता के रूप में कार्य कर चुके माकपा नेता ने कहा कि किसी बैठक में अनुपस्थिति किसी भी तरह से आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी निर्देशों का उल्लंघन नहीं है, इसलिए जारी किया गया कारण बताओ नोटिस कानूनी कसौटी पर टिकने वाला नहीं है।
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यह सीधे तौर पर आपदा प्रबंधन कानून का उल्लंघन

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