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इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर पूरे देश में करते थे ठगी

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Sat, 26 May 2018 10:51 PM IST
 इंश्योरेंस कंपनी
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साउथ कैंपस थाना पुलिस ने इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान निशांत खान, मोहम्मद जावेद, वासु कुमार, रईस मलिक और राहुल शर्मा के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में देश में 184 लोगों से ठगी करने का आंकड़ा सामने आ चुका है। इनके पांच बैंक खातों में 1,40,05,000 रुपये जमा हैं।
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दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी मिलिंद डुम्बेरे के अनुसार, गणेश नगर, तिलक नगर निवासी दिनेश कुमार गुप्ता ने 9 नवंबर, 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी कि एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस में पॉलिसी देने के नाम अज्ञात लोगों ने उससे 3.70 लाख रुपये ठग लिए हैं। मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की तो पता लगा कि आरोपियों ने पैसे जमा कराने के पीड़ित को देना बैंक और विजय बैंक का खाता नंबर दिया था। दोनों खाते जाकिर नगर, ओखला निवासी निशांत खान की आईडी पर खोले गए थे। 

इस पर 21 मई को निशांत को जामिया नगर से गिरफ्तार कर लिया। निशांत ने बताया कि ये खाते जावेद ने उसकी आईडी पर खोले थे और वही इसका इस्तेमाल करता है। इस पर दरियागंज से जावेद को गिरफ्तार कर लिया गया। जावेद से ठगी की रकम में से 45,000 रुपये बरामद किए गए। जावेद ने बताया कि वह वासु कुमार के लिए काम करता था। इसके बाद वासु को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वासू के पूछताछ के बाद 24 मई को विकास कुंज, लोनी देहात, गाजियाबाद निवासी राहुल शर्मा उर्फ अंशुमन चौहान और खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद निवासी रईस मलिक (26) को भी दबोच लिया गया। इनके पास से मोबाइल, दो सिम, दो बैंक पासबुक के साथ राहुल शर्मा के मां के नाम खरीदे गए 11 लाख के प्रॉपर्टी के कागजात बरामद किए। वहीं पुलिस लकरा मोहल्ला अमरोहा (यूपी) निवासी मोहम्मद शोइब को तलाश रही है।

ऐसे करते थे ठगी

आरोपी पहले विभिन्न बैंक और एजेंटों से इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर का डाटा खरीद लेते थे। फिर पॉलिसी होल्डर को फोन कर कहते थे कि उनकी पॉलिसी का 40 से 50 फीसदी प्रीमियम एजेंट के खाते में चला जाता है। अगर वह दूसरी पॉलिसी खरीदेंगे तो वह उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाएंगे। उन्हें नई पॉलिसी की तीन प्रीमियम जमा कराने होंगे। आरोपी पीड़ित से आटीजीएस या फिर एनईएफटी के जरिये खातों में प्रीमियम का पैसा जमा करा लेते थे। आरोपी पीड़ित को इंश्योरेंस पॉलिसी के फर्जी कागजात मेल कर देते थे। इसके बाद गायब हो जाते थे।

बीसीए कर चुका है वासु

मूलत: वीपीओ गोहावर जैत, (बिजनौर) निवासी वासु ने देहरादून विश्वविद्यालय से बीसीए किया हुआ है। बीसीए करने के बाद वह गिरोह में शामिल हो गया। यह ग्राहकों को फोन करता था। वहीं रहीस मूल रूप से गांव सुदुपुरा (बिजनौर) का रहने वाला था। राहुल शर्मा डीयू से स्नातक है।

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