रोज दो लाख के जूते बेचते थे, अब 10-12 हजार की बिक्री हो रही, कब पटरी पर लौटेगी जिंदगी?

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Jul 2020 08:55 AM IST
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कनॉट प्लेस - फोटो : सोशल मीडिया

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राजधानी दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस घूम आइए, सन्नाटा पसरा मिलेगा। बाटा के शो-रूम में जाने पर सेल्समैन ने बताया कि अनलॉक-1 खत्म और अनलॉक-टू शुरू होने वाला है, लेकिन ग्राहक नहीं हैं। सेल्समैन के मुताबिक औसतन 2 लाख रुपये के जूते रोज बिक जाते थे, अब 10-12 हजार रुपये का सामान बमुश्किल बिक रहा है।
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हीरा स्वीट हो या हल्दीराम, ग्राहकों की लाइन लगी रहती थी। अब सन्नाटा है। यूनाइटेड काफी हाउस हो या एम्बेसी होटल, राजस्थानी थाली सब तरफ बस खामोशी है। रीगल बिल्डिंग में खादी भंडार की चहल-पहल गायब है। कैश काउंटर पर पता चला कि बिक्री 40-55 प्रतिशत तक घट गई है।
फुटपाथ पर जींस की पैंट और शर्ट बेचने वाले वीरेन्द्र कुमार बताते हैं कि काम धंधा बिल्कुल चौपट हो चुका है। वह पिछले 20 साल से कनॉट प्लेस में फुटपाथ पर कपड़ा बेचते हैं। पहली बार उन्होंने इतने भयानक आर्थिक हालात देखे हैं।
वीरेन्द्र कुमार बताते हैं कि दिनभर की मेहनत के बाद भी दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाना मुश्किल हो गया है। वीरेन्द्र के अनुसार रीगल के इस गलियारे में कम से कम 100 लोग कुछ न कुछ बेचकर अपना गुजारा कर ले रहे थे। लेकिन आज सबकी हालत पतली हो गई है। 
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जनपथ बाजार की चहल-पहल भी गायब

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