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Hindi News ›   India News ›   Truck operators strike: Petrol, diesel, LPG cylinders supply chain may be affected from 25 July

ट्रक हड़ताल खत्म नहीं हुई तो बुधवार से पेट्रोल-डीजल, एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई चेन हो सकती है बाधित

जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Sat, 21 Jul 2018 10:14 PM IST
Truck Strike
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19 जुलाई से देशभर में शुरू हुई ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल अगर बुधवार तक खत्म नहीं हुई तो पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सरकारी एवं निजी क्षेत्रों के अलावा सामान्य जन को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि तेल और गैस कंपनियों द्वारा अनेक शहरों में प्राइवेट टैंकरों के माध्यम से सप्लाई की जाती है। इस बार ये वाहन भी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। दूसरी ओर, शनिवार को केंद्र सरकार की तरफ से बातचीत के लिए ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पास कोई न्यौता नहीं पहुंचा।


इसलिए हो रही है ट्रक हड़ताल

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष बल मलकीत सिंह का कहना है कि देश में डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम में भी वृद्धि कर दी है। इसके अलावा ट्रक ऑपरेटरों को टोल की वजह से हर साल करीब 1.5 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि टोल से मिलने वाला सालाना राजस्व महज 19 हजार करोड़ रुपये है।


खत्म हो सकती है हड़ताल अगर ये मांगें हो जाएं पूरी

-ट्रक ऑपरेटरों की मुख्य मांग है कि डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। इससे कीमतें कुछ कम हो जाएंगी।

-सरकार इसके लिए भी तैयार नहीं है तो डीजल पर टैक्स की दरें घटा दे।

-बीमा नियामक विकास प्राधिकरण थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम में कटौती करे। 

-टोल व्यवस्था खत्म की जाए। इससे ट्रक ऑपरेटरों का समय बचेगा और ईंधन भी व्यर्थ नहीं जाएगा। 

हड़ताल नहीं रूकी तो होगा बहुत बुरा असर

truck strike
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हड़ताल लंबी चली तो अभूतपूर्व असर होगा

दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रजिंदर कपूर का कहना है कि सोमवार तक करीब 92 लाख ट्रक सड़क से हट जाएंगे। इनके साथ ही 52 लाख प्राइवेट बसें, कैब और टूर एंड ट्रैवल से जुड़े वाहन भी इस बार ट्रक ऑपरेटरों के साथ आ गए हैं। सोमवार तक वे सभी ट्रक अपने गन्तव्य तक पहुंच जाएंगे, जिनकी बुकिंग हड़ताल शुरू होने से पहले हो गई थी। इसके बाद पूरे देश में कोई भी ट्रक नहीं चलेगा। केवल दूध, फल-सब्जियों की गाड़ियों को ही चलने की अनुमति होगी।

कपूर के मुताबिक, अगले दो तीन दिन में जब पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई पर असर पड़ेगा, तब सरकार को हड़ताल का मतलब समझ में आएगा। आप सोच सकते हैं कि बिना इंधन के ट्रैफिक कैसे चलेगा। यदि आम ट्रैफिक प्रभावित हुआ तो स्कूल, कालेज, दफ्तर और दूसरे स्थानों पर होने वाली आवाजाही भी हड़ताल के फेर में आ जाएगी। 

रुक सकती है हड़ताल अगर...

truck strike
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उम्मीद की किरण बाकी है

रजिंद्र कपूर का कहना है कि अगर सरकार की तरफ से उन्हें बातचीत के लिए न्यौता आता है तो वे बात करेंगे। 19 जुलाई की रात एक बजे तक हमने सरकार के साथ बैठक की थी, लेकिन समाधान नहीं निकला। इस बार तो सरकार को दो महीने पहले ही हड़ताल की सूचना दे दी गई थी।

इसके बाद भी सरकार ने ट्रक ऑपरेटरों की मांगों पर कोई विचार नहीं किया। हम यह हड़ताल मजबूरी में कर रहे हैं। इससे ट्रक ऑपरेटरों को रोजाना चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। खैर जो भी हो, अब यह सरकार को तय करना है कि वह कितनी जल्दी इस हड़ताल को खत्म कराती है। 
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