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महाराष्ट्र : मुंबई के आसपास उजड़ रहा है प्रवासी पक्षियों का रैन बसेरा, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 09 May 2021 03:32 AM IST

सार

मुंबई के माहुल और शिवड़ी समेत नवी मुंबई का उरण स्थित पांजे इलाका प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा स्थल है। पांजे बांबे पोर्ट ट्रस्ट के दूसरे छोर पर स्थित हैं। जहां दलदल भूमि (वेटलैंड्स) और मैंग्रोव को नष्ट कर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, एसईजेड आदि बनाया जा रहा है।
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प्रवासी पक्षी
प्रवासी पक्षी - फोटो : pixabay

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विस्तार

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस पर पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि और मैंग्रोव्ज के विनाश को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रकृति ने यह क्षेत्र मानवता की रक्षा के लिए दिया है, लेकिन इसका विनाश हो रहा है। साथ ही, भगवान के डाकिए प्रवासी पक्षियों का रैन बसेरा भी उजड़ रहा है। पर्यावरणविदों की यह आशंका नवी मुंबई में बन रहे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को लेकर है, जहां पक्षियों के आश्रय स्थल खत्म होने से विमानों के उड़ान में मुसीबत पैदा होगी।
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मुंबई के माहुल और शिवड़ी समेत नवी मुंबई का उरण स्थित पांजे इलाका प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा स्थल है। पांजे बांबे पोर्ट ट्रस्ट के दूसरे छोर पर स्थित हैं। जहां दलदल भूमि (वेटलैंड्स) और मैंग्रोव को नष्ट कर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, एसईजेड आदि बनाया जा रहा है।


गैरसरकारी संस्था नेट कनेक्ट फाउंडेशन ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्री और मुख्यमंत्री के साथ ही आर्द्रभूमि से खेलने के खतरों को लेकर एएलपीए इंडिया, इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ इंडियन पॉयलट एंड इंडियन पॉयलट गिल्ड को पत्र भेजा है।

इधर, महाराष्ट्र के शहरी योजनाकार सिडको अगले दो वर्षों के भीतर 16000 करोड़ रुपये की लागत से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को पूरा करने में जुटा है। फाउंडेशन के बीएन कुमार का कहना है कि अर्बन स्पंज खत्म हो जाएगा तो पक्षियों के लिए आहार नहीं बचेगा।

अकेले उरण में आते हैं 10 हजार से दो लाख प्रवासी पक्षी
एनबी कुमार बताते हैं कि प्रवासी पक्षियों के आवागमन के लिए सेंट्रल एशिएन फ्लाईवे मार्ग है। इसी मार्ग से नवी मुंबई में उरण स्थित पांजे इलाके में 289 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले आर्र्दभूमि में हर साल अक्तूबर माह में दुबई और टर्की से 10 हजार से लेकर 2 लाख फ्लैंमिंगो आदि करीब ढाई सौ प्रजाति के पक्षी आते हैं और फिर अप्रैल-मई में इंडोनेशिया और मलेशिया आदि देशों की ओर निकल पड़ते हैं। कल्पना करें कि जब आप विमान की लैंडिंग और टेक-ऑफ कर रहे हैं और नए एयरपोर्ट पर उतर रहे हैं तो आहार और आराम करने की तलाश में आकाश में 10,000 पक्षी उड़ रहे हैं। ऐसे में क्या स्थिति हो सकती है।

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