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श्रमिक स्पेशल ट्रेन से सबसे अधिक प्रवासी कामगार पहुंचे बिहार, बंगाल जाने वाले सबसे कम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 06 May 2020 01:13 AM IST
प्रवासी कामगार
प्रवासी कामगार - फोटो : पीटीआई

कोरोना वायरस का संकमण फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन की वजह से देशभर के विभिन्न इलाकों में फंसे प्रवासी कामगारों को उनके गृह प्रदेश में पहुंचाने के लिए रेलवे द्वारा चलाई जा रहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेन से सबसे अधिक श्रमिक बिहार पहुंचे जबकि पश्चिम बंगाल लौटने वाले कामगारों की संख्या सबसे कम है।



अधिकारियों ने संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल दूसरे राज्यों में फंसे अपने कामगारों की वापसी को बाधित कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और राज्यसभा में पार्टी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने केंद्र पर राजनीति करने का आरोप लगाया।


आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में काम करने वाले सबसे अधिक प्रवासी श्रमिक अपने गृह राज्यों को लौटे हैं जहां से अबतक 35 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई हैं। इसके बाद केरल का स्थान है जहां से 13 ट्रेन रवाना हुई हैं।

आंकड़ों के मुताबिक श्रमिकों को लेकर सबसे अधिक रेलगाड़ियां बिहार पहुंची हैं। यहां अबतक 13 विशेष रेलगाड़ियों से श्रमिक पहुंच चुके हैं जबकि 11 रेलगाड़ियां अब भी रास्ते में हैं एवं छह विशेष रेलगाड़ी का परिचालन प्रक्रिया में है।

बता दें कि प्रत्येक रेलगाड़ी में अधिकतम 1,200 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है और अबतक ऐसी 67 रेलगाड़ियों का संचालन किया जा चुका है जिनमें सवार होकर करीब 67 हजार प्रवासी श्रमिक अपने गृह राज्यों तक पहुंचे हैं।

उत्तर प्रदेश में अबतक 10 विशेष रेलगाड़ियां पहुंची जबकि राजस्थान में मात्र तीन

पड़ोसी उत्तर प्रदेश में अबतक 10 विशेष रेलगाड़ियां पहुंच चुकी हैं जबकि पांच और श्रमिक विशेष रेलगाड़ी रास्ते में है एवं 12 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का परिचालन प्रक्रिया में है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने अब तक केवल दो विशेष रेलगाड़ियों को ही मंजूरी दी है जिनमें से एक राजस्थान से और दूसरी केरल से रवाना हुई हैं और अभी रास्ते में हैं।

एक वरिष्ट अधिकारी ने बताया कि एक ओर अन्य राज्य देश के दूसरे हिस्सों से अपने कामगारों को वापस बुला रहे हैं वहीं पश्चिम बंगाल इस प्रक्रिया को बाधित कर रहा है। दो रेलगाड़ी - ठाणे से शालीमार (हावड़ा के नजदीक) और बेंगलुरु से हावड़ा- को आज रवाना होना है लेकिन इन रेलगाड़ियों को जहां से प्रस्थान करना है वहां की सरकारों के दबाव के बावजूद राज्य सरकार ने मंजूरी नहीं दी है।

उन्होंने बताया,राजस्थान की भी अपने प्रवासी कामगारों को स्वीकार करने की गति कम है। केवल तीन रेलगाड़ियां ही अबतक राज्य सरकार ने स्वीकार की है जो इस समय रास्ते में हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड ने चार विशेष रेलगाड़ियों को स्वीकार किया जबकि राज्य के श्रमिकों को लेकर आ रही पांच अन्य रेलगाड़ियां रास्ते में है। झारखंड के लिए दो श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों को चलाने की प्रक्रिया चल रही है।
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