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Supreme Court: बीटेक की छात्रा बच्चे को जन्म देने पर सहमत, सुप्रीम कोर्ट ने प्रसव के बाद गोद देने की दी इजाजत

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 02 Feb 2023 10:30 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा है कि गर्भावस्था के अंतिम चरण को देखते हुए यह मां और भ्रूण के सर्वोत्तम हित में माना गया है कि बच्चे को प्रसव के बाद किसी और को गोद दिया जा सकता है।  

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 29 सप्ताह से अधिक समय से अनचाहे गर्भ से पीड़ित 20 वर्षीय बीटेक छात्रा को प्रसव के बाद बच्चे को गोद देने की अनुमति दे दी। बच्चे को पालने में असमर्थता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने इसकी इजाजत दे दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने नोट किया कि याचिकाकर्ता (छात्रा) के वकील, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी और डॉ अमित मिश्रा ने छात्रा को बच्चे को जन्म देने के लिए राजी किया लेकिन वह बच्चे को रखना नहीं चाहती है।



शीर्ष अदालत ने कहा है कि गर्भावस्था के अंतिम चरण को देखते हुए यह मां और भ्रूण के सर्वोत्तम हित में माना गया है कि बच्चे को प्रसव के बाद किसी और को गोद दिया जा सकता है। याचिकाकर्ता द्वारा किसी और को गोद देने का अनुरोध किया गया है क्योंकि वह बच्चे की देखभाल करने की स्थिति में नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक दंपति केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत बाल दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद बच्चे को गोद लेने और उसकी अच्छी देखभाल करने के लिए तैयार है। 


वहीं भाटी ने कहा कि उन्होंने याचिकाकर्ता की बहन के साथ भी बातचीत की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह बच्चे को गोद लेने के लिए तैयार है। हालांकि बहन ने कई कारणों से ऐसा करने में असमर्थता व्यक्त की।  वहीं मिश्रा ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता मानसिक दबाव में है। उन्होंने कहा, 'वह टूट गई है। उसने छात्रावास छोड़ दिया है। उसका जीवन दांव पर है।'
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