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सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: निष्पक्ष चुनाव को कमजोर करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 23 Jul 2021 09:43 PM IST

सार

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में साल 1989 में हुए चुनाव के दौरान बूथ लूटने के एक मामले में दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ एक अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
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Supreme Court
Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि बूथ लूटने और फर्जी वोटिंग के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाना चाहिए क्योंकि इससे कानून के शासन और लोकतंत्र पर असर पड़ता है।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, 'मतदान प्रणाली का मकसद मतदाताओं को अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना होना चाहिए। किसी को भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के अधिकार को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव ऐसा तंत्र है जिससे जनादेश का पता चलता है। किसी को भी इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती है कि वह स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करे। 


झारखंड में 1989 में चुनाव की पूर्व संध्या पर हुआ था दंगा
शीर्ष अदालत ने लक्ष्मण सिंह और अन्य द्वारा झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एक अपील को खारिज करते हुए ये बातें कही हैं। 1989 के आम चुनावों की पूर्व संध्या पर दंगा और हाथापाई के मामले में दोषसिद्धि व छह महीने की जेल को सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराया जाने का फैसला सही है। ये सभी गैरकानूनी सभा के सदस्य थे और इन सभी ने समान इरादे से मतदाता सूची छीनी थी और फर्जी मतदान किया था। हालांकि पीठ ने सजा पर हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि राज्य सरकार ने इसे लेकर अपील दायर नहीं की थी।

लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है चुनाव
चुनाव संबंधी अपराधों के बारे में गंभीर दृष्टिकोण रखते हुए शीर्ष अदालत ने 'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' (2013) के मामले में अपने पिछले फैसले का उल्लेख किया। पीठ ने अपने फैसले में उस फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि मतदान की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक हिस्सा है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लोग भयमुक्त होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव संविधान की मूल संरचना का एक हिस्सा हैं। चुनाव एक तंत्र है जो अंततः लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है।
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