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सीबीआई, एनआईए, ईडी के दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाएं : सुप्रीम कोर्ट

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 03 Mar 2021 02:44 AM IST

सार

  • नाराज शीर्ष अदालत ने सरकार से कहा- पैर पीछे खींचने की हो रही कोशिश, राज्य सरकारों को भी पांच महीने में सभी थानों में कैमरे लगाने का निर्देश।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई, एनआईए और ईडी जैसे केंद्रीय जांच एजेंसियों के दफ्तरों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगने पर नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने फटकार वाले अंदाज में कहा कि सरकार इस मामले से पैर पीछे खींचने की कोशिश कर रही है।
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अदालत ने केंद्र सरकार को सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य सरकारों को अगले पांच महीने में देश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार को तीन हफ्ते और राज्य सरकारों को एक महीने के भीतर हलफनामा दाखिल करने को भी कहा गया है। अगली सुनवाई होली के बाद होगी।


जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला है। हमें ऐसा लग रहा है कि सरकार इस मामले से अपने पैर पीछे खींचने की कोशिश कर रही है। जस्टिस नरीमन के साथ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की मौजूदगी वाली पीठ ने सवाल किया कि आखिर सुनवाई टालने के लिए क्यों गुहार की गई थी। दरअसल, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को पत्र लिखकर मंगलवार को होने वाली सुनवाई को टालने की मांग की थी।
 
वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये चल रही सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि पत्र के जरिए इसलिए सुनवाई टालने की मांग की गई थी कि आदेश के प्रभावों पर गौर किया जा सके। इस पर पीठ ने पूछा, किस तरह का प्रभाव? हमें किसी भी तरह के प्रभाव से मतलब नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों को मिलने वाले अधिकारों से संबंधित है। हम सुनवाई टालने के लिए पत्र में दिए ‘बहाने’ को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

इसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने उस पत्र को नजरअंदाज करते हुए सुनवाई टालने की गुहार लगाई। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से सवाल किया कि आप हमें यह बताइए कि इन जांच एजेंसियों के दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कितना फंड आवंटित किया गया है। इस पर मेहता ने अदालत के सवालों का जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिनों का वक्त मांगा। 

पीठ ने उन्हें हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। हलफनामे में उन्हें सीसीटीवी कैमरे लगाने में होने वाले खर्च और अदालत के निर्देशों का पालन करने की टाइम लाइन भी बताने के लिए कहा गया है। साथ ही पीठ ने राज्य सरकारों को भी एक महीने के भीतर हलफनामा देकर यह बताने को कहा है कि अदालती निर्देशों का पालन करने के लिए कितने बजटीय आवंटन की दरकार है।

राज्य सरकारों को हलफनामा देने के चार महीने के भीतर सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा गया है। इससे पहले पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता व न्याय मित्र सिद्धार्थ दवे की तरफ से पेश रिपोर्ट पर भी गौर किया, जिसमें विभिन्न राज्यों में अदालत के निर्देश का पालन करने के लिए प्रस्तावित टाइम लाइन दी गई थी। 

बता दें कि पीठ ने पिछले साल दो दिसंबर को अपने आदेश में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने की पूरी कार्य योजना छह सप्ताह में हलफनामे में दाखिल करने को कहा था। यह हलफनामा सभी राज्यों के मुख्य सचिव या कैबिनेट सचिव या गृह सचिव की तरफ से दाखिल किए जाने का निर्देश दिया गया था। 
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