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जौहर विवि मामला : आजम की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 01 Oct 2022 05:24 AM IST
सार

पीठ याचिका पर विचार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। पीठ ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने के लिए कहा।

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने रामपुर में जौहर विवि का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की राज्य सरकार की कार्रवाई और तीन नई एफआईआर के खिलाफ समाजवादी पार्टी नेता आजम खां की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया।


  
जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आजम की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 87 मामलों में जमानत मिलने के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ जौहर विवि को लेकर तीन नए मुकदमे दर्ज किए गए हैं। लेकिन पीठ याचिका पर विचार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। पीठ ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने के लिए कहा। जिसके बाद आजम ने अपनी याचिका वापस ले ली। जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में एक ट्रस्ट द्वारा की गई थी और आजम खां इस निजी विश्वविद्यालय के चांसलर हैं।  


ताज के इतिहास का अध्ययन करने के लिए बने खोज समिति : याची
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके ताजमहल के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने और विवाद को शांत करने के लिए एक तथ्य खोज समिति के गठन की मांग की गई है। याचिकाकर्ता डॉ. रजनीश सिंह ने कहा कि ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में वर्ष 1631 से 1653 तक की अवधि में किया था, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। 

याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 मई के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी थी कि मुद्दे का निर्धारण न्यायिक तरीके से नहीं किया जा सकता है।
  
याचिका के अनुसार, एनसीईआरटी ने आरटीआई प्रश्न में जवाब दिया कि शाहजहां द्वारा ताजमहल के निर्माण के संबंध में कोई प्राथमिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में एक और आरटीआई दायर की लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 

हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता ने ताजमहल में सीलबंद 22 कमरों को अध्ययन और निरीक्षण के लिए खोलने के निर्देश भी मांगे थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एसएलपी में याचिकाकर्ता ने कहा कि वह केवल इस पर जोर दे रहे हैं कि ताजमहल के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने के लिए तथ्य खोज समिति का गठन किया जाए। 
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हर समस्या का हल अदालत में आने से नहीं होगा : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जनसंख्या नियंत्रण पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई जारी रखने के लिए अनिच्छा जताई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि समाज में हमेशा कुछ विवादों को हल करने की आवश्यकता होती है लेकिन हर समस्या को सीधे शीर्ष अदालत में जाने से हल नहीं किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ भी सभी राज्यों को नोटिस जारी करने से हिचक रही थी, जिसकी याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में मांग की थी। इसमें देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्यों को दो बच्चों का कानून लागू करने सहित अन्य कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। 

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