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सुप्रीम कोर्ट: जंगल की जमीन से समझौता नहीं कर सकते, फरीदाबाद के खोरी गांव का मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 03 Aug 2021 10:49 PM IST

सार

फरीदाबाद के खोरी गांव में वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि जंगल की जमीन से कोई समझौता नहीं होगा। अदालत ने कहा कि इस मामले में पहले जारी किया गया आदेश बहुत स्पष्ट है और अवैध रूप से बनाए गई इमारतों को गिराना होगा।
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सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि फरीदाबाद के खोरी गांव में अरावली जंगल की जमीन पर बने अवैध निर्माण हटाए जाएं और अवैध निर्माण हटाने की वीडियोग्राफी भी की जाए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने 23 अगस्त तक पुनर्वास नीति का ड्राफ्ट पूरा करने का निर्देश भी दिया। 
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बता दें कि शीर्ष अदालत ने 23 जुलाई को फरीदाबाद नगर निगम को वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए चार और सप्ताह का समय दिया था। अदालत ने आज नगर निगम आयुक्त को एक स्थिति रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा जिसमें उनके सामने आए पुनर्वास संबंधी आवेदनों के परिणाम शामिल हो सकते हैं।  


न्यायाधीश एएम खानविलकल और दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा कि जो लोग इस नीति के तहत पात्र हैं, उनके पुनर्वास की संभावना है। राज्य उन लोगों का पुनर्वास क्यों करे जो पात्र नहीं हैं और जिन्होंने जमीन हथियाई है। हमारा आदेश साफ है कि जंगल की जमीन पर बने सभी अवैध निर्माण हटाने होंगे।

वहीं, नगर निगम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि वहां रहने वाली 50 फीसदी आबादी किराये पर रहती थी और ज्यादातर लोग जा चुके हैं। राधा स्वामी सत्संग परिसर और रेड क्रॉस में इंतजाम किए गए हैं। यदि किसी को शिकायत है तो वह निवारण के लिए आयुक्त से संपर्क कर सकता है।

पीठ ने मामले की सुनवाई 25 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी। 

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