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चुनावी राज्यों में भाजपा की तैयारी: मुसलमानों को साधने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार, पसमांदा पर केंद्रित होगी रणनीति

हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 26 Oct 2021 06:04 AM IST
सार

भाजपा प्रयोग के तौर पर उन बूथों पर ध्यान केंद्रित करेगी जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 70 फीसदी से अधिक है और पसमांदा मुसलमानों की तादाद ज्यादा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुसलमानों को साधने का पार्टी की ओर से यह पहला प्रयोग है।

भाजपा (सांकेतिक तस्वीर)
भाजपा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी समेत पांच चुनावी राज्यों में भाजपा पहली बार मुसलमान मतदाताओं को साधने के लिए अपनी टीम मैदान में उतारेगी। इसका ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है। पार्टी इसके लिए बड़ा अभियान शुरू करने के बजाय केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों से सीधा और व्यक्तिगत संपर्क साधेगी।



प्रयोग के तौर पर पार्टी उन बूथों पर ध्यान केंद्रित करेगी जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 70 फीसदी से अधिक है और पसमांदा मुसलमानों की तादाद ज्यादा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुसलमानों को साधने का पार्टी की ओर से यह पहला प्रयोग है। व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क के दौरान पार्टी कार्यकर्ता केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों को मोदी सरकार के सात साल के कार्यकाल के दौरान इस वर्ग के भलाई के लिए हुए कार्यों का ब्योरा देंगे। यह तय किया गया है कि इस बार के चुनाव में मुस्लिम बहुल सभी बूथों पर पार्टी के कार्यकर्ता मुस्तैदी से जुटे रहेेंगे। मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर सौ नए सक्रिय कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की जाएगी।


मुसलमानों को केंद्रीय योजना से हुआ दोगुना लाभ : नकवी
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना हो या किसान सम्मान निधि योजना या फिर कोई अन्य योजना। बीते सात सालों में मुसलमानों को उनकी आबादी के अनुपात में अन्य वर्ग की तुलना में दोगुना लाभ मिला है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी करीब 18 फीसदी है, जबकि इन योजनाओं में इस बिरादरी की हिस्सेदारी 30 से 35 फीसदी है। शैक्षणिक छात्रवृत्तियों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है।

पसमांदा समाज पर जोर...
मोदी सरकार ने खासतौर पर पसमांदा समाज को योजनाओं का लाभ देने के लिए चिह्नित किया था। मुसलमानों की केंद्रीय योजनाओं में कुल हिस्सेदारी में इस समाज की हिस्सेदारी 80 फीसदी है। इसलिए प्रयोग के तौर पर पहले इसी समाज को साधने की रणनीति बनाई गई है।

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