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श्रीलंका संकट: विक्रमसिंघे सरकार में पेट्रोलियम मंत्री के गार्ड ने बरसाई गोलियां, एक की मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Updated Sun, 28 Oct 2018 08:14 PM IST
sri lanka: Minister arjuna ranatunga security guard fired on the crowd
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प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त किए जाने के बाद से देश में जारी राजनीतिक संकट रविवार को हिंसक और तनावपूर्ण हो गया। विक्रमसिंघे सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे अर्जुन रणतुंगा के एक सुरक्षा गार्ड ने भीड़ पर फायरिंग कर दी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई व तीन लोग जख्मी हो गए। जिस समय गार्ड ने गोलियां चलाईं, उस वक्त रणतुंगा अपने दफ्तर जा रहे थे।
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हालांकि, वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं। घटना के बाद गार्ड को गिरफ्तार कर लिया गया। अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि उसने किस मंशा से गोलीबारी की थी। शुक्रवार को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। विक्रमसिंघे को हटाए जाने के बाद पहली बार कोई बड़ी हिंसक घटना हुई है।

प्रमुख प्रतिष्ठानों पर सेना, स्पेशल फोर्स तैनात
विक्रमसिंघे को बर्खास्त किए जाने के बाद से राष्ट्रपति सचिवालय समेत राजधानी कोलंबो के प्रमुख प्रतिष्ठानों पर सेना, पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स तैनात है। विक्रमसिंघे हालांकि अब भी अपने सरकारी आवास कम दफ्तर में बने हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि बहुत जल्द यह मामला कोर्ट में पहुंचने वाला है।

यूएनपी ने विक्रमसिंघे को हटाए जाने को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि जब तक संसद में शक्ति परीक्षण नहीं होता, तब तक विक्रमसिंघे प्रधानमंत्री बने रहेंगे। पार्टी के एक सांसद ने बताया कि राष्ट्रपति के इस असांविधानिक कार्रवाई के खिलाफ हम मंगलवार को कोलंबो में एक विरोध मार्च का आयोजन करने जा रहे हैं।

मीडिया ने बताया ‘सांविधानिक तख्तापलट’
प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को बर्खास्त किए जाने और उनकी जगह महिंदा राजपक्षे को कुर्सी देने के राष्ट्रपति सिरिसेना के फैसले को श्रीलंकाई मीडिया ने ‘सांविधानिक तख्तापलट’ करार दिया है। साप्ताहिक अखबार ‘संडे मार्निंग इंग्लिश’ ने अपने संपादकीय में श्रीलंका में इस पूरे घटनाक्रम को ‘सांविधानिक तख्तापलट’ का पहला चरण बताया है। वहीं, संडे टाइम्स ने लिखा, ‘सिरिसेना-राजपक्षे के बीच हुई इस डील की राष्ट्रपति के वफादार लोगों तक को भनक नहीं थी।’

राजपक्षे की वापसी से एचआरडब्ल्यू चिंतित
राजपक्षे की सत्ता में वापसी पर मानवाधिकार वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने चिंता जताई है। एचआरडब्ल्यू का कहना है कि जिस वक्त राजपक्षे श्रीलंका के राष्ट्रपति थे, उस दौरान देश में मानवाधिकार उल्लंघन की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। एचआरडब्ल्यू ने यह भी कहा कि श्रीलंका की मौजूदा सरकार लिट्टे से लड़ाई के दौरान युद्ध अपराध के पीड़ितों को न्याय दिलाने में पूरी तरह असफल रही है।
 
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घमंडी व्यवहार ने छीनी विक्रमासिंघे की कुर्सी: सिरिसेना

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