{"_id":"63ef94e308c8ccd3d00eab4c","slug":"shiv-sena-rift-timeline-uddhav-thackeray-lost-both-cm-post-and-party-in-8-months-know-all-about-it-in-hindi-2023-02-17","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Shiv Sena Timeline: उद्धव ठाकरे आठ महीने में मुख्यमंत्री पद और पार्टी दोनों से हाथ धो बैठे; जानें कब-क्या हुआ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
टाइमलाइन
Shiv Sena Timeline: उद्धव ठाकरे आठ महीने में मुख्यमंत्री पद और पार्टी दोनों से हाथ धो बैठे; जानें कब-क्या हुआ
चुनाव आयोग (EC) ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दे दी है। इसके साथ ही शिंदे गुट को पार्टी का चुनाव चिह्न 'तीर-धनुष' आवंटित कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि शिवसेना का 2018 में संशोधित किया गया संविधान ईसी के रिकॉर्ड में नहीं है। यह महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए बड़ी झटका है। उनके पिता दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की बनाई पार्टी अब शिंदे गुट की हो गई है। आखिर बात यहां तक पहुंची कैसे? कैसे इस विवाद की शुरुआत हुई? आइए सिलसिलेवार तरीके से समझने की कोशिश करते हैं...
21 जून 2022
यह संकट 21 जून 2022 को शुरू हुआ, जब एकनाथ शिंदे और कई अन्य विधायक भाजपा शासित गुजरात में सूरत में जाकर किसी होटल में छिप गए।
23 जून 2022
एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनके पास 35 विधायक हैं। उनके समर्थन का पत्र जारी कर शिंदे उद्धव सरकार में खलबली मचा दी।
24 जून 2022
विधानसभा के उपाध्यक्ष ने 16 बागी विधायकों को अयोग्य करार देने से जुड़ा नोटिस भेजा। बागियों को जवाब देने को कहा गया। इसके लिए बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
26 जून 2022
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, शिवसेना, महाराष्ट्र पुलिस और विधानसभा उपाध्यक्ष को नोटिस भेजकर जवाब मांगा।
28 जून 2022
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने फ्लोर टेस्ट की मांग की। इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे से बहुमत साबित करने को कहा।
29 जून 2022
फ्लोर टेस्ट का मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उद्धव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
30 जून 2022
भाजपा और शिंदे गुट ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री और फडणवीस के उपमुख्यमंत्री बनाने पर सहमति बनी।
चार जुलाई 2022
एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में बहुमत हासिल किया। 288 सदस्यीय विधानसभा में सरकार के विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 164 विधायकों ने मत डाले गए। विरोध में मात्र 99 वोट पड़े।
तीन अगस्त 2022
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने 10 दिन के लिए सुनवाई टाली थी। इस बीच आपने सरकार बना ली। स्पीकर बदल गए। अब आप कह रहे हैं, सारी बातें निरर्थक हैं।
चार अगस्त 2022
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फैसला लेने से रोक दिया।
23 अगस्त 2022
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संविधान पीठ के पास स्थानांतरित कर दिया। चुनाव आयोग को कोई भी फैसला न करने को कहा।
सात सितंबर 2022
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह शिवसेना पर शिंदे या उद्धव ठाकरे गुट में से किसके असली होने के दावों को लेकर चुनाव आयोग को आगे विचार करना चाहिए या नहीं, इस पर 27 सितंबर को विचार करेगी।
27 सितंबर 2022
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फैसले लेने के लिए कहा।
आठ अक्तूबर 2022
चुनाव आयोग ने शिवसेना के चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी। आदेश में कहा गया कि महाराष्ट्र के अंधेरी उपचुनाव में दोनों गुट में से किसी को भी शिवसेना का चुनाव चिह्न "धनुष और तीर" का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सात अक्तूबर 2022
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में होने वाले आगामी उप-चुनाव के लिए शिवसेना उद्धव गुट को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया है। उद्धव गुट को चुनाव चिह्न के साथ पार्टी का नया नाम भी आवंटित किया गया है। उद्धव गुट की शिवसेना का नया नाम शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे मिला है। वहीं, शिंदे गुट की शिवसेना को भी नया मिल गया है। इस गुट वाली पार्टी को चुनाव आयोग ने बालासाहेबची शिवसेना नाम आवंटित किया है।
तीन नवंबर 2022
महाराष्ट्र की अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए गए। इस सीट से अब तक शिवसेना के रमेश लटके विधायक थे। रमेश अपने परिवार के साथ दुबई गए थे, जहां दिल का दौरा पड़ने के कारण 12 मई को उनका निधन हो गया था। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने ऋतुजा लटके को अंधेरी पूर्व विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी बनाया था। भाजपा ने अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया था।
12 दिसंबर 2022
महाराष्ट्र में मूल शिवसेना के लिए उद्धव ठाकरे गुट और सीएम शिंदे गुट के बीच लड़ाई को लेकर चुनाव आयोग ने गुटों की दलीलें सुनने के लिए अगली तारीख पांच जनवरी तय की। सुनवाई के दौरान दोनों गुटों के वकीलों ने पार्टी के नाम और चिन्ह पर दावा करने के लिए प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने के लिए और समय मांगा।
30 जनवरी 2023
शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी संगठन और चुनाव चिह्न पर अपना दावा जताते हुए अंतिम दस्तावेज पेश किए। दोनों गुटों ने पार्टी के चिन्ह के रूप में 'धनुष और तीर' और पार्टी संगठन पर अपना दावा जताते हुए निर्वाचन आयोग के सामने लिखित में अपनी बात रखी।
17 फरवरी 2023
चुनाव आयोग ने शिवसेना के दो गुटों में जारी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की लड़ाई पर फैसला सुना दिया है। आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव निशान शिंदे गुट को दे दिया है। आयोग ने 78 पेज के आदेश में पूरे विवाद के बारे में विस्तार में बताते हुए कहा कि शिंदे गुट के पास ज्यादा समर्थन है।
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।