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CRPF डीजी का विदाई भाषण: अफगानिस्तान में तालिबान के आने से घाटी में बढ़ीं चुनौतियां, बिहार को किया नक्सलमुक्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 29 Sep 2022 10:43 PM IST
सार

डीजी कुलदीप सिंह ने कहा कि स्थिति में एक स्पष्ट सुधार हुआ है और जिन क्षेत्रों को पहले माओवादियों का गढ़ माना जाता था, वे अब उनके प्रभाव से मुक्त हैं और सुरक्षा बलों के प्रभुत्व वाले हैं।

Kuldiep Singh, DG, CRPF (file photo)
Kuldiep Singh, DG, CRPF (file photo) - फोटो : ANI
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विस्तार

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के निवर्तमान महानिदेशक कुलदीप सिंह ने कहा कि पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से जम्मू-कश्मीर में चुनौतियां कई तरह से बढ़ गई हैं। शुक्रवार को सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे सीआरपीएफ प्रमुख और 1986 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि चुनौतियां बढ़ गई हैं और अब यह जम्मू-कश्मीर में देखी जा रही है। पहले विदेशी आतंकवादियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई और बाद में संख्या में थोड़ी कमी आई।



सक्रिय आतंकवादियों की संख्या 200 से कम 
सिंह ने हालांकि कहा कि मौजूदा दौर में आतंकवादियों की संख्या बहुत कम है। सक्रिय आतंकवादियों की संख्या 200 से कम है जो किसी समय 240 हुआ करती थी। सीआरपीएफ के डीजी ने कहा कि इन आतंकवादियों में विदेशी और स्थानीय दोनों आतंकी शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में एक प्रवृत्ति है कि विदेशी और स्थानीय दोनों तरह के आतंकवादियों की संख्या 230-240 हुआ करती थी। लेकिन अब संख्या 200 से नीचे रह गई है क्योंकि उनमें से कई को सुरक्षा बलों द्वारा समय-समय पर बेअसर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कोई चुनौती नहीं है।


देशभर तैनात है सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मी 
अपने विदाई भाषण में डीजी ने यह भी जिक्र किया कि सीआरपीएफ को देश की आंतरिक सुरक्षा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है और ये राज्य पुलिस और नागरिक प्रशासन को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए देश भर में तैनात है। उन्होंने यह भी बताया कि सीआरपीएफ 119 गणमान्य व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करता है, जिनमें से 18 जेड प्लस में और 27 जेड श्रेणी में हैं। बल में अब 246 बटालियन हैं, जिनमें से 202 जीडी (ग्राउंड ड्यूटी) बीएन, छह वीआईपी सुरक्षा, छह महिला, 15 आरएएफ, 10 कोबरा, पांच सिग्नल और पीडीजी और एसडीजी में से एक-एक हैं। बल के पास 43 ग्रुप सेंटर, चार 100 बेड वाले कम्पोजिट अस्पताल भी हैं।  

बिहार को माओवादी मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
उन्होंने बताया कि कैसे नक्सली गतिविधियों को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में काफी हद तक नियंत्रित किया गया है। सिंह ने कहा कि स्थिति में एक स्पष्ट सुधार हुआ है और जिन क्षेत्रों को पहले माओवादियों का गढ़ माना जाता था, वे अब उनके प्रभाव से मुक्त हैं और सुरक्षा बलों के प्रभुत्व वाले हैं। बल ने बिहार को माओवादी मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। माओवादियों को चक्रबंधा और भीमबंध क्षेत्र से खदेड़ दिया गया है और अब बिहार लगभग माओवादी मुक्त हो गया है। झारखंड में ऑपरेशन ऑक्टोपस के साथ अथक और गहन अभियानों के बाद बुरहापहाड़ में शिविर स्थापित किए गए हैं जिसे हाल तक माओवादियों का गढ़ माना जाता था। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 11 माओवादियों को ढेर कर दिया गया, 387 को पकड़ा गया और 370 ने आत्मसमर्पण कर दिया। 

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