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अपराध के दायरे से बाहर हो सकती है धारा 377

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Jul 2018 04:14 AM IST
Section 377 will be out of the scope of crime says supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा-377 की वैधता तय करते वक्त संवैधानिक मूल्यों का पालन किया जाएगा न कि यह देखा जाएगा कि इस पर ज्यादातर लोगों का नजरिया क्या है। पीठ ने कहा कि अगर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया जाता है तो एलजीबीटी समुदाय पर लगा सामाजिक कलंक और असमानता आदि भी खत्म हो जाएगी।
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यह पथभ्रष्टता नहीं, बल्कि भिन्नता है। वर्षों से हम सभी में समलैंगिकों के प्रति भेदभाव की भावना घर कर गई है। धारा-377 में बदलाव से दो सहमति वाले व्यक्ति अंतरंग हो सकते हैं, नौकरी ले सकते हैं क्योंकि इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने 1860 के इस कानून में संशोधन नहीं किया है तो इसका यह कतई मतलब नहीं है कि कुछ लोग इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इस प्रावधान को चुनौती नहीं दे सकते।

वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा समलैंगिकता को अपराध के दायरे से मुक्त करने के फैसले को पलट दिया था लेकिन शीर्ष अदालत ने यह संसद के विवेक पर छोड़ दिया था कि अगर जरूरी हो तो वह इसमें संशोधन कर सकती है।
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एलजीबीटी समुदाय को अधिकारों से महरूम रखा जा रहा

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