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Mohan Bhagwat: भागवत बोले- जनता के सामूहिक प्रयास से आता है बदलाव, एक नेता सभी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 09 Aug 2022 11:03 PM IST
सार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ की विचारधारा के आधार पर एक बात यह है कि एक भी नेता इस देश के सामने सभी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता है। नेता कितना भी बड़ा हो, वह ऐसा भी नहीं कर सकता।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : amar ujala
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विस्तार

एक नेता इस देश के सामने आई सभी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता और कोई एक संगठन या पार्टी बदलाव नहीं ला सकती। ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहीं। वे नागपुर में मराठी साहित्य की संस्था विदर्भ साहित्य संघ के शताब्दी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश को आजादी तभी मिली जब आम लोग सड़क पर उतरे। 



आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ की विचारधारा के आधार पर एक बात यह है कि एक भी नेता इस देश के सामने सभी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता है। नेता कितना भी बड़ा हो, वह ऐसा भी नहीं कर सकता।  उन्होंने कहा, "एक संगठन, एक पार्टी, एक नेता बदलाव नहीं ला सकते। वे इसे लाने में मदद करते हैं। बदलाव तब होता है जब आम आदमी इसके लिए खड़ा होता है।"


अपने संबोधन में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ये 1857 में बहुत पहले शुरू हुआ था, लेकिन यह तभी सफल हुआ जब समाज में व्यापक जागरूकता थी। उन्होंने कहा कि जब आम आदमी सड़क पर उतरे तब आंदोलन सफल हुआ। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों ने भी स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया और सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी की। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हर कोई जेल नहीं गया, कुछ लोग दूर रहे, लेकिन एक व्यापक भावना थी कि देश को स्वतंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस चाहता है कि हिंदू समाज अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हो जाए। उन्होंने कहा कि सब कुछ समाज में बदलाव से होता है और आरएसएस समाज को संगठित कर रहा है।

भागवत ने कहा कि लोगों को देश की दशा सुधारने का ''अनुबंध'' दूसरों को नहीं देना चाहिए बल्कि खुद जिम्मेदारी उठानी चाहिए, उन्होंने कहा कि लोगों को यह सीखना होगा। 

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