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Hindi News ›   India News ›   Rohingya row: Indo-Bangladesh and Indo-Myanmar border are points where Rohingya Muslims easily enter in India

Rohingya row: बॉर्डर पर यहां लग रही 'सेंध', मुश्किल नहीं है रोहिंग्या मुस्लिमों की भारत में एंट्री की राह

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 18 Aug 2022 05:42 PM IST
सार

Rohingya row: पिछले तीन-चार साल में रोहिंग्या मुस्लिमों के अलावा बांग्लादेश के लोगों की भारत में अवैध तरीके से एंट्री बढ़ी है। जम्मू, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व दूसरे राज्यों में अवैध तरीके से हजारों रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं...

Rohingya row
Rohingya row - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार

रोहिंग्या मुस्लिमों को दिल्ली के ईडब्ल्यूएस फ्लैट में शिफ्ट करने की योजना को लेकर विवाद छिड़ा है। मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को सामने आना पड़ा। मंत्रालय ने कहा, रोहिंग्या अवैध प्रवासियों को ईडब्ल्यूएस फ्लैट में शिफ्ट करने का निर्णय नहीं लिया गया है। इसके बाद केंद्र एवं दिल्ली सरकार के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। यहां पर बड़ा सवाल है कि देश में 40 हजार से अधिक रोहिंग्या कैसे पहुंच गए। इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बॉर्डर के कई हिस्सों पर सेंध लग रही है। खासतौर से वहां पर, जहां कंटीली तार नहीं लगी है। भारत-बांग्लादेश और भारत-म्यांमार बॉर्डर पर ऐसे प्वाइंट मौजूद हैं, जहां से रोहिंग्या मुस्लिमों की भारत में एंट्री आसान बन जाती है। पश्चिम बंगाल और असम से लगती सीमा पर बांग्लादेश से भी मानव तस्करी हो रही है। यहां पर बॉर्डर का एक बड़ा क्षेत्र, नदियों व पहाड़ों वाला है। ऐसे में यहां फेंसिंग लगाना मुश्किल हो जाता है।

रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार वापस लौटना होगा

बांग्लादेश की प्रधानंमत्री शेख हसीना के प्रेस सचिव एहसानुल करीम ने बुधवार को यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेचलेट से कहा है, अब रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार वापस लौट जाना चाहिए। ये शरणार्थी, हिंसक उत्पीड़न से बचने के लिए बांग्लादेश आए थे। मिशेल बेचलेट ने म्यांमार सीमा के निकट कॉक्स बाजार जिले में ऐसे शिविरों का दौरा किया, जहां बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं। बांग्लादेश में रोहिंग्याओं की संख्या 14 लाख से ज्यादा है। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं कि रोहिंग्या मुस्लिम, दो ही रास्तों से भारत में आ सकते हैं। एक बांग्लादेश सीमा से और दूसरा म्यांमार बॉर्डर के रास्ते। इन दोनों ही बॉर्डर पर कई ऐसे रास्ते हैं, जहां फेंसिंग नहीं लगी है।



बतौर एसके सूद, भारत और बांग्लादेश की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा पर करीब एक हजार किलोमीटर के क्षेत्र में फेंसिंग नहीं है। यह इलाका नदी, तालाब, खेत व सघन आबादी वाले गांवों से घिरा हुआ है। बॉर्डर की यह ऐसी जगह है, जहां घर का एक हिस्सा भारत में है और दूसरा बांग्लादेश में है। इन इलाकों में बॉर्डर गार्डिंग फोर्स रहती है, लेकिन हर समय आबादी के बीच लोगों पर नजर रखना संभव नहीं हो पाता। यहां से मानव तस्करी के मामले आते रहते हैं। भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम व मणिपुर से सटी है। यहां से भी रोहिंग्या मुस्लिम भारत में प्रवेश कर जाते हैं।

एनआईए ने किया था खुलासा

पिछले तीन-चार साल में रोहिंग्या मुस्लिमों के अलावा बांग्लादेश के लोगों की भारत में अवैध तरीके से एंट्री बढ़ी है। जम्मू, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व दूसरे राज्यों में अवैध तरीके से हजारों रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं। एनआईए ने दिसंबर 2021 में दर्ज एक केस में बांग्लादेश के मुस्लिमों और रोहिंग्याओं की अवैध तस्करी का खुलासा किया था। बांग्लादेश के मुस्लिमों और रोहिंग्याओं को भारत में लाकर उनके फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराए गए। एनआईए ने इस केस को लेकर कई जगहों पर छापे मारे थे। असम, पश्चिम बंगाल व मेघालय सहित कई दूसरे राज्यों में ऐसे गिरोह का पता चला था, जो भारतीय क्षेत्र में रोहिंग्या मुसलमानों की तस्करी कर रहा था। म्यांमार का बॉर्डर, मिजोरम से भी लगता है। वहां घना जंगल है। कुछ क्षेत्रों में आदिवासियों के आने जाने पर रोक नहीं है। मित्रता संधि ने भी दोनों देशों के बीच लोगों का आना जाना सुगम बना दिया है। इसकी आड़ में भी रोहिंग्या आ सकते हैं। एक दशक में पांच लाख से अधिक बांग्लादेशी महिलाएं व बच्चे, अवैध तौर पर भारत में आ चुके हैं। इनमें ज्यादातर महिलाओं को काम दिलाने के बहाने यहां लाया जाता है। उसके बाद बहुत सी महिलाओं को देह व्यापार में डाल दिया जाता है। अधिकांश पीड़ित महिलाएं, शिकायत नहीं करती। शादी के लिए रोहिंग्या महिलाओं को बेचा भी जाता है।

आमने-सामने हैं आप और भाजपा

रोहिंग्या शरणार्थियों को दिल्ली में ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स देने के मामले में भाजपा और आम आदमी पार्टी आमने-सामने आ गई हैं। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का आरोप है कि केंद्र सरकार चोरी छुपे, रोहिंग्याओं को दिल्ली में बसाना चाह रही है। जब खुद की चोरी पकड़ी गई तो वह अपना दोष आम आदमी पार्टी पर डाल रही है। दिल्ली सरकार अवैध रूप से रोहिंग्याओं को राष्ट्रीय राजधानी में बसाने की साजिश को कामयाब नहीं होने देगी। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने दो कदम आगे बढ़कर इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा है। उन्होंने कहा, जिस तरह से कांग्रेस ने बांग्लादेशियों को बसाया और उन्हें अपना वोट बैंक बनाया, अब वैसे ही भाजपा रोहिंग्याओं को बसा रही है। भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, रोहिंग्याओं की घुसपैठ, भारत के लिए खतरा है। दिल्ली की आप सरकार, राष्ट्र सुरक्षा को ताक पर रखकर तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, अवैध रोहिंग्याओं को कानून के अनुसार उनके देश वापस भेजने तक निरुद्ध केंद्रों में रखा जाना चाहिए। दिल्ली सरकार को उनके ठहरने के मौजूदा स्थल को निरुद्ध केंद्र घोषित करने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था, रोहिंग्या शरणार्थियों को बाहरी दिल्ली स्थित बक्करवाला के अपार्टमेंट में भेजा जाएगा। उन्हें मूलभूत सुविधाएं और पुलिस सुरक्षा भी मुहैया कराई जाएगी। उनके इसी बयान के बाद विवाद शुरू हो गया था। ईडब्ल्यूएस फ्लैट, एनडीएमसी ने तैयार कराए हैं। एनडीएमसी, केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है।

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