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Rajasthan Congress Crisis: BJP में CM बदल जाते हैं फिर भी नहीं होती बगावत, कांग्रेस में ही ऐसा क्यों होता है?

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 28 Sep 2022 03:44 PM IST
सार

Rajasthan Congress Crisis: राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि भाजपा में मुख्यमंत्री बदलने पर ना कोई हंगामा हो रहा है, न ही कोई बगावत के सुर देखने को मिल रहे हैं। वह कहते हैं इसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा का मजबूत शीर्ष नेतृत्व का होना ही है...

Rajasthan Congress Crisis
Rajasthan Congress Crisis - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

बीते डेढ़ साल के भीतर भाजपा ने अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदल दिया। लेकिन इतने बड़े बदलाव के बाद भी पार्टी में बगावत के नाम पर राज्यों में न तो कोई हंगामा हुआ और न ही किसी नेता की जुबान से विरोध के स्वर निकले। वहीं राजस्थान में सिर्फ मुख्यमंत्री बदलने की सुगबुगाहट के साथ केंद्रीय पर्यवेक्षकों के सामने न सिर्फ बगावत हुई, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए भी पार्टी के लिए बड़ी मुसीबतें खड़ी कर दीं। पंजाब में मुख्यमंत्री बदला, तो दोबारा सरकार ही सत्ता में नहीं आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दरअसल यह सारी परिस्थितियां कमजोर शीर्ष नेतृत्व के चलते ही पैदा हो रही हैं। क्योंकि पार्टी में लंबे अरसे से स्थाई तौर पर कोई भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं है। इसका असर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और अनुशासन पर पड़ रहा है।

कांग्रेस में कोई स्थाई अध्यक्ष नहीं

कांग्रेस में मची उठापटक और हो रही बगावत को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तो उठती ही हैं कि आखिर वजह क्या है कि कांग्रेस में पल-पल और कदम-कदम पर न सिर्फ बगावत हो रही है, बल्कि पार्टी के बड़े नेता दामन छोड़कर जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक आरएन त्रिवेदी कहते हैं कि दरअसल कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी इस वक्त यही है कि उसके पास अपना कोई स्थाई राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं है। इससे राज्यों के भीतर कमजोर केंद्रीय नेतृत्व का संदेश जाता है। केंद्रीय नेतृत्व की कमजोर पकड़ के चलते राज्य इकाइयां प्रभावी रूप से अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत नहीं बना पा रही हैं। हालांकि त्रिवेदी का कहना है कि सिर्फ कमजोर नेतृत्व की वजह से पार्टी में बगावत नहीं हो रही हैं, बल्कि कांग्रेस में बगावत की बड़ी वजह यह भी है कि कमजोर केंद्रीय नेतृत्व का फायदा राज्य नेतृत्व मजबूती के साथ उठा लेता है और हालात बिगड़ जाते हैं। खासतौर से जहां पर सत्ता है वहां तो राज्य का नेतृत्व ही हावी है।



वह आगे कहते हैं कि आप कांग्रेस का हाल के दिनों का पुराना इतिहास उठाकर देख लीजिए, जिन राज्यों में सत्ता परिवर्तन की बात आई वहां पर बगावत ही हुई। चाहे पंजाब हो या फिर राजस्थान। पंजाब में जब पार्टी ने मुख्यमंत्री बदला तो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के हाल में हुए चुनावों में अंदरूनी तौर पर इतना विरोध था कि सत्ता की सीढ़ी से पार्टी कोसों दूर रही। छत्तीसगढ़ में भी हालात बदलने शुरू हुए थे लेकिन सुधर गए।

भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मजबूत

राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि भाजपा में मुख्यमंत्री बदलने पर ना कोई हंगामा हो रहा है, न ही कोई बगावत के सुर देखने को मिल रहे हैं। वह कहते हैं इसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा का मजबूत शीर्ष नेतृत्व का होना ही है। सिंह कहते हैं कि आप इसे कांग्रेस के ही दौर से जोड़ कर देखिए, तो पता चलेगा कि इंदिरा गांधी के मजबूत नेतृत्व में इसी तरीके के हालात दूसरी पार्टियों के लिए थे जो आज कांग्रेस के बने हुए हैं। राजीव गांधी के मजबूत नेतृत्व में भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति थी। यह दोनों वे नेता हैं जिनके नेतृत्व में पूरे देश में पार्टी को न सिर्फ वोट मिलते थे, बल्कि संगठन भी मजबूत हो रहा था। आज भाजपा में नरेंद्र मोदी, अमित शाह की जोड़ी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा में यह क्षमता है कि बड़े-बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री बदल दे, तो भी संगठन में कोई आवाज नहीं होती है। सिंह का कहना है कि ऐसा सिर्फ इसीलिए है कि पार्टी के निचले स्तर पर मौजूद कार्यकर्ता को इस बात का भरोसा है कि जो केंद्रीय नेतृत्व फैसला ले रहा है, उससे उनकी पार्टी मजबूत हो रही है।


वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक जानकार हरिशंकर कहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर जब तक मजबूत नेतृत्व नहीं होगा और निचले स्तर पर मौजूद कार्यकर्ता के भीतर इस बात का विश्वास नहीं होगा कि ऊपर से लिया गया फैसला सही है, तब तक संगठन की मजबूती नहीं हो सकती। वह कहते हैं कि यही वजह है कि बीते डेढ़ साल के भीतर भाजपा ने कई राज्यों में मुख्यमंत्रियों को लगातार बदल दिया। जबकि कई राज्यों में दूसरे बड़े संगठनों से आए नेताओं को मुख्यमंत्री जैसा पद भी दे दिया। भाजपा की अपने ऐसे नए प्रयोगों की वजह से ही लोगों के बीच स्वीकार्यता भी बढ़ रही है। हरिशंकर कहते हैं कि जब तक कांग्रेस में मजबूत लीडरशिप नहीं होगी, तब तक इस तरीके की समस्याओं का सामना पार्टी को करना पड़ेगा। वह कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि पार्टी में नेता मजबूत नहीं है। लेकिन अभी भी मजबूत नेतृत्व की इच्छाशक्ति की कमी के चलते ही सब कुछ सामान्य नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि जैसे ही नेतृत्व मजबूत होगा और मजबूत नेतृत्व के साथ संगठनात्मक स्तर पर उसी इच्छाशक्ति से काम किया जाएगा, तो निश्चित तौर पर हालात भी सामान्य होंगे। फिलहाल कांग्रेस में अभी यही कई कमजोर कड़ियां हैं। जिसके चलते हर स्तर पर उनको इस तरीके की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

पार्टी एक विचारधारा

भाजपा सांसद और पार्टी के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर कहते हैं कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। देश के लोगों को पता है कि भाजपा के लिए राष्ट्र प्रथम है। पार्टी एक विचारधारा है और पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता उस विचारधारा के लिए काम करता है। हमारे लिए अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी का नेतृत्व इतना मजबूत और भरोसेमंद है कि पार्टी के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े हुए कार्यकर्ता को भी उसमें उतना ही भरोसा होता है जितना कि वह अपने घर के मुखिया पर करता है। राजकुमार कहते हैं कि यही वजह है कि भाजपा में आज देश के लोगों का जबरदस्त भरोसा है, उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी में कोई उद्देश्य ही नहीं है। वहां पर विचारधारा की कोई बातचीत ही नहीं होती है। कांग्रेस केवल एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है। सांसद राजकुमार कहते हैं कि यह बात कांग्रेस के बचे हुए कार्यकर्ता को पता है कि वहां पर सिर्फ एक परिवार से आगे कुछ भी नहीं है।

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