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Railway Relief: पूर्वोत्तर के बाढ़ ग्रस्त राज्यों में मुफ्त में राहत सामग्री पहुंचाएगा रेलवे, गैर-सरकारी संगठन भी फ्री में भेज सकते हैं मदद

न्यूज डेस्क अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 27 Jun 2022 07:59 PM IST
सार

पूर्वोत्तर के राज्यों की मदद के लिए देश के किसी भी हिस्से से यहां के लिए सभी प्रकार के माल ढुलाई शुल्क माफ कर दिए गए हैं। साथ ही राहत सामग्री के परिवहन के लिए कोई सहायक शुल्क जैसे विलंब शुल्क या अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।

भारतीय रेल
भारतीय रेल - फोटो : twitter
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विस्तार

पूर्वोत्तर के बाढ़ ग्रस्त राज्यों में रेलवे सभी राहत सामग्री मुफ्त में पहुंचाएगा। रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे मेघालय और असम आदि में मानसूनी बारिश मुसीबत बनकर आई है। बारिश के कारण यहां नदियों में बाढ़ आ गई है, जिसके कारण जन-जीवन अस्तव्यस्त हो गया है। 



रेलवे फ्री में भेजेगा राहत सामग्री
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने गुवाहाटी में कहा कि मुफ्त परिवहन पार्सल वैन या द्वितीय श्रेणी, सामान सह गार्ड वैन और मालगाड़ियों द्वारा भेजे जाने वाले अंतर-राज्य सहायता और राहत सामग्री के लिए लागू होगा। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों की मदद के लिए देश के किसी भी हिस्से से यहां के लिए सभी प्रकार के माल ढुलाई शुल्क माफ कर दिए गए हैं। साथ ही राहत सामग्री के परिवहन के लिए कोई सहायक शुल्क जैसे विलंब शुल्क या अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।


गैर-सरकारी संगठन भी भेज सकते हैं मदद
उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठन सरकार की तरह क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुफ्त में राहत सामग्री भेज सकते हैं। हालांकि, गैर सरकारी संगठनों को मंडल रेलवे प्रबंधकों से उचित अनुमोदन की आवश्यकता होगी। मंडल रेलवे प्रबंधकों   को पूर्वोत्तर राज्यों में जाने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त कोच या वैन जोड़ने सहित किसी भी अतिरिक्त सुविधाओं पर निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए राहत सामग्री के साथ मानक से कम कंपोजिशन रेक बुक किए जा सकते हैं। 

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि गैर सरकारी संगठनों के मामले में कंसाइनर या कंसाइनी जिला मजिस्ट्रेट या डिप्टी कमिश्नर होना चाहिए, जिसके अधिकार क्षेत्र में डिस्पैचिंग या रिसीविंग स्टेशन स्थित है।

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