कसा शिकंजा: निजी अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी भारतीय मरीजों की अनदेखी पड़ेगी भारी

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Thu, 14 Jun 2018 01:27 AM IST
Private hospitals will not run arbitrarily, Indian patients dont ignore
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हृदय और अंग प्रत्यारोपण में प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी केचलते इस सप्ताह दो हार्ट प्रत्यारोपित होने से भी रह गए। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर लगाम कस दी है। अब से इसके लिए एक मॉनीटरिंग कमेटी बना दी गई। सभी राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों से प्रत्यारोपण खासतौर पर हदय प्रत्यारोपण के लिए भारतीय मरीजों की वेटिंग सूची तलब की गई है।  नेशनल आर्गन और टिशु ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन ने निजी अस्पतालों को आदेशित किया है कि अब वरीयता क्रम में पहले भारतीय, उसके बाद एनआरआई और फिर विदेशियों को प्रत्यारोपण का लाभ दे ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।      
 
देश भर में अंग प्रत्यारोपरण खासतौर पर हदय प्रत्यारोपण की लंबी प्रतीक्षा सूची के बाद भी प्राइवेट अस्पताल बड़े पैमाने पर भारतीय मरीजों को दरकिनार कर विदेशी मरीजों को अंग प्रत्यारोपण कर रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले दक्षिण भारत में चेन्नई से आए है। इसमें अस्पतालों की मिली भगत केचलते पिछले एक माह में कम से कम चार विदेशी मरीजों का हदय प्रत्यारोपित किया गया।  इसके  पीछे अस्पतालों ने तर्क दिया की भारतीय मरीज है ही नहीं जबकि अकेले एम्स में ही सौ से ज्यादा वेटिंग लिस्ट है।       

जबकि  हदय विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में 50 हजार लोगों को हर साल हदय प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। लेकिन केवल पचास लोगों को इसका लाभ मिलता है। अगर मेट्रो शहरों की बात करे तो एक समय में तीन सौ हार्ट की जरूरत होती है। इसकी वजह अनियमित दिनचर्या है और सबसे ज्यादा युवा  इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इसमें 15 से 30 साल तक की आयु वाले लोग है। अमूमन पचास साल की आयु में होने वाला रोग जल्द दस्तक दे रहा है। ऐसे में  हदय प्रत्यारोपण की मांग भी बढ़ती जा रही है। एक भारतीय को इसके लिए पचास लाख रुपये खर्च करने होते हैं।  यहां खेल करके प्राइवेट अस्पताल विदेशियों से इसका एक से दो करोड़ वसूल लेते हैं। इसलिए यह धंधा तेजी से फलफूल रहा है। देश में चेन्नई और कर्नाटक इसका बड़ा हब है।    
   
नोटो मुताबिक दिल्ली में केवल एम्स में इसकी सुविधा है।  प्राइवेट अस्पतालों में गंगाराम, बीएलके, फोटस और अपोल मैक्स इसकी सुविधा देते हैं। लिहाजा अब नोटो ने अपनी निगेहबानी इन पर भी सख्त कर दी है। डॉ विमल भंडारी अध्यक्ष नोटो के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देश के अंतिम छोर के मरीज को भी मिलना चाहिए प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर रोक लग कर रहेगी।  इसलिए अभी कमेटी बना दी है। जल्द नई गाइड लाइन आएंगी और कानूनों में बदलाव किया जाएगा। ताकि मनमानी करने वाले अस्पतालों पर शिकंजा कसा जा सके।     

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