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PM Modi Get Blessings: पीएम ने स्वतंत्रता सेनानी कृष्णमूर्ति की 90 वर्षीय बेटी से लिया आशीर्वाद, उनके चरणों में झुकाया शीश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीमावरम Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 04 Jul 2022 01:58 PM IST
सार

पसाला कृष्ण मूर्ति आंध्र प्रदेश के एक सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी थे। पीएम मोदी पसाला कृष्ण भारती के अलावा भारती की बहन और भतीजी से भी मिले। 

पीएम ने 90 साल की पसाला कृष्ण भारती के चरणों में शीश नवाया
पीएम ने 90 साल की पसाला कृष्ण भारती के चरणों में शीश नवाया - फोटो : ANI
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आंध्रप्रदेश के भीमावरम में स्वतंत्रता सेनानी अल्लुरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती समारोह में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने एक अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पसाला कृष्णमूर्ति के परिजनों से मुलाकात की। पीएम ने कृष्णमूर्ति की 90 साल की बेटी पसाला कृष्ण भारती के चरणों में शीश नवाया तो उन्होंने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। 


पसाला कृष्ण मूर्ति आंध्र प्रदेश के एक सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी थे। पीएम मोदी पसाला कृष्ण भारती के अलावा भारती की बहन और भतीजी से भी मिले। 
इससे पहले पीएम मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी अल्लुरी सीतराम राजू की 125वीं जयंती समारोह में भाग लिया। पीएम ने कांस्य की बनी उनकी प्रतिमा का अनावरण भी किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'आंध्र की इस धरती की महान आदिवासी परंपरा को, इस परंपरा से जन्मे सभी महान क्रांतिकारियों और बलिदानियों को भी आदरपूर्वक नमन करता हूं। सीताराम राजू गारू की 125वीं जन्मजयंती व रम्पा क्रांति की 100वीं वर्षगांठ को पूरे साल मनाया जाएगा।'

आजादी का संग्राम बलिदानों का इतिहास 
प्रधानमंत्री ने कहा, आजादी का संग्राम केवल कुछ वर्षों का, कुछ इलाकों का या कुछ लोगों का इतिहास नहीं है। ये इतिहास, भारत के कोने-कोने और कण-कण के त्याग, तप और बलिदानों का इतिहास है। उन्होंने कहा, हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास हमारी विविधता, सांस्कृतिक शक्ति और एक राष्ट्र के रूप में हमारी एकजुटता का प्रतीक है।
युवाओं के लिए उत्तम अवसर 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, स्वतंत्रता आंदोलन में देश की आजादी के लिए युवाओं ने आगे आकर नेतृत्व किया था। आज नए भारत के सपनों को पूरा करने के लिए युवाओं के पास सबसे उत्तम अवसर है। देश में नए आयाम खुल रहे हैं। नई सोच है और नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं। 
दूसरा बारदोली कहलाता है आंध्र का भीमावरम
आंध्र प्रदेश का भीमावरम दूसरा बारदोली कहलाता है। 1920 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया था। इससे भीमावरम में राष्ट्रवाद की भावना जागी और इस छोटे से शहर के लोगों ने अंग्रेज सरकार को टैक्स देना बंद कर दिया। इस शक्तिशाली विद्रोह की सूचना मिलने पर गांधी जी ने भीमावरम का जिक्र अपनी पत्रिका 'हरिजन' में दूसरे बारदोली (गुजरात) आंदोलन के रूप में किया था।

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