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जी-7 शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने किया, ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ का आह्वान, आज भी करेंगे सत्र को संबोधित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 13 Jun 2021 01:45 AM IST

सार

जी-7 शिखर सम्मेलन के माध्यम से पिछले दो साल में पहली बार दुनिया की सात बड़ी आर्थिक शक्तियां एक साथ एक मंच पर नजर आई हैं। चीन और रूस अलग-अलग कारणों के चलते इस शिखर सम्मेलन का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को डिजिटल माध्यम से इस सम्मेलन को संबोधित किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र को डिजिटल तरीके से संबोधित करते हुए कोरोना वायरस महामारी से प्रभावी तौर पर निपटने के लिए ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कोविड-19 रोधी टीकों के लिए पेटेंट छोड़ने को लेकर जी-7 के देशों के समर्थन का भी आग्रह किया।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक भविष्य की महामारी को रोकने के लिए वैश्विक एकजुटता, नेतृत्व और तालमेल का आह्वान करते हुए मोदी ने चुनौती से निपटने के लिए लोकतांत्रिक और पारदर्शी समाजों की विशेष जिम्मेदारी पर जोर दिया।



सूत्रों ने बताया कि ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण अपनाने के मोदी के आह्वान का जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों ने भी कोविड-19 टीकों का उत्पादन बढ़ाने के लिए पेटेंट पर छूट के मोदी के आह्वान का जोरदार समर्थन किया है। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन में यह प्रस्ताव रखा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर पेटेंट छूट के संबंध में भारत, दक्षिण अफ्रीका द्वारा डब्ल्यूटीओ में दिए गए प्रस्ताव के लिए जी-7 के समर्थन का भी आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 के ‘बिल्डिंग बैक स्ट्रांगर-हेल्थ’ संपर्क सत्र को संबोधित करते हुए महामारी से निपटने के लिए भारत के 'समग्र समाज' के दृष्टिकोण को रेखांकित किया और सरकार, उद्योग और सिविल सोसाइटी के प्रत्येक स्तर पर प्रयासों में तालमेल के बारे में बताया।

अपने संबोधन में मोदी ने डब्ल्यूटीओ में कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर छूट के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव पर जी-7 के देशों के समर्थन का आह्वान किया।

विज्ञप्ति में कहा गया, प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्वास्थ्य शासन में सुधार को लेकर सामूहिक प्रयासों के लिए भारत के सहयोग की प्रतिबद्धता जतायी। उन्होंने कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा अधिकार के कारोबारी पहलुओं संबधी छूट) के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में दिए गए प्रस्ताव पर जी-7 के समर्थन का भी आह्वान किया। 

इसमें कहा गया, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की बैठक से समूचे विश्व के लिए ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ का संदेश जाना चाहिए। 

जी-7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं। जी-7 की अध्यक्षता कर रहे ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देश के तौर पर आमंत्रित किया है।

मोदी ने ट्वीट किया, स्वास्थ्य पर जी-7 सम्मेलन के सत्र में भाग लिया। कोविड-19 की हालिया लहर के दौरान सहयोग के लिए भागीदारों का शुक्रिया। भारत भविष्य की महामारी को रोकने के लिए वैश्विक कार्रवाई का समर्थन करता है। मानवता के लिए हमारा संदेश ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ का है।

सत्र के दौरान मोदी ने भारत में कोविड-19 की हालिया लहर के दौरान जी-7 और अन्य अतिथि देशों द्वारा की गयी मदद के लिए उनकी सराहना की। विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने संपर्क का पता लगाने और टीकों के प्रबंधन के लिए ओपन सोर्स डिजिटल प्रणाली के सफल इस्तेमाल के बारे में भी बताया और दूसरे विकासशील देशों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने की इच्छा प्रकट की। 

प्रधानमंत्री रविवार को जी-7 सम्मेलन के समापन दिन भी भागीदारी करेंगे और दो सत्र को संबोधित करेंगे।

टीके पर पेटेंट छूट में ऑस्ट्रेलिया आया साथ
प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 देशों से भारत और दक्षिण अफ्रीका की तरफ से कोविड से जुड़ी तकनीकों व टीकों पर पेटेंट छूट (ट्रिप्स वेवर) के लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में दाखिल प्रस्ताव पर साथ मांगा। इस प्रस्ताव का जी-7 देशों की तरफ से सत्र के दौरान जिक्र किया गया। ऑस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने सम्मेलन के दौरान ही पीएम मोदी से इस मुद्दे पर बात की और प्रस्ताव को डब्ल्यूटीओ में अपने देश का मजबूत समर्थन देने का वादा किया। इससे पहले सम्मेलन के दौरान एक बार फिर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि टीके के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई बिना रुकावट होनी चाहिए, ताकि भारत जैसे देश बिना रुकावट दुनिया के लिए ज्यादा टीकों का उत्पादन कर सकें। मैक्रों ने यह अपील सम्मेलन से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी की थी।

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